CG News: मैनपाट में बॉक्साइट खदानों की जनसुनवाई में ग्रामीणों का जोरदार विरोध, अमरजीत भगत भी समर्थन में उतरे
ग्रामीणों का जोरदार विरोध
CG News: छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में चार नई बॉक्साइट खदानों के लिए जनसुनवाई आज से शुरू हो गई. जनसुनवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध किया और कहा कि वे किसी भी हाल में मैनपाट में अब बॉक्साइट खदान नहीं खुलने देंगे. जहां जनसुनवाई आयोजित की गई थी, वहां सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण विरोध जताने पहुंचे. इस दौरान लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि गांव के लोग बॉक्साइट खदान नहीं चाहते हैं, इसके बावजूद जानबूझकर यहां खदानों को स्वीकृति दिलाई जा रही है.
लोगों का कहना है कि इसकी वजह से मैनपाट का पर्यावरण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. क्षेत्र की नदियों का जलस्तर कम हो गया है, लेकिन इसके बाद भी प्रशासनिक अधिकारी लगातार माइंस खोल रहे हैं. बता दें कि मैनपाट में चार नई खदानों को स्वीकृति दी गई है, जिससे 700 हेक्टेयर से अधिक जमीन माइंस क्षेत्र में तब्दील हो जाएगी. वहीं आसपास के कई दर्जन गांव भी इससे प्रभावित होंगे.
ग्रामीणों का विरोध लगातार बढ़ा
सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र में प्रस्तावित बॉक्साइट खदानों को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में खनन परियोजनाओं के खिलाफ जनविरोध के बावजूद अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. आज जनसुनवाई के दौरान जब ग्रामीण विरोध कर रहे थे, तब पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने गांव वालों के विरोध का समर्थन किया.
NOC प्रक्रिया को लेकर नाराजगी
ग्रामीणों के अनुसार, छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (CMDC) द्वारा ग्राम पंचायतों से NOC प्राप्त करने के लिए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को पत्र लिखा गया है. इसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है. उनका कहना है कि जनभावनाओं की अनदेखी करते हुए खनन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.
चार स्थानों पर प्रस्तावित हैं नई खदानें
जानकारी के मुताबिक, मैनपाट के नर्मदापुर-कुनिया गांव में लगभग 139 हेक्टेयर, पथरई-लुरेना गांव में 79 हेक्टेयर, कमलेश्वरपुर क्षेत्र में 147 हेक्टेयर तथा सरभंजा गांव में 200 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में बॉक्साइट खदान शुरू करने का प्रस्ताव है. इन परियोजनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार विरोध देखने को मिल रहा है.
पर्यावरण और पर्यटन पर असर की आशंका
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित खनन परियोजनाओं से मैनपाट के जलस्रोतों, भूजल स्तर और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. उनका दावा है कि खनन गतिविधियों से क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थलों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है. लोगों का कहना है कि मैनपाट की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा और पर्यटन से है, जिसे बचाना जरूरी है.
ग्रामीणों ने मांगा विस्तृत अध्ययन
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में लगातार विरोध के बावजूद NOC प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने मांग की है कि किसी भी निर्णय से पहले प्रभावित गांवों के लोगों की राय को प्राथमिकता दी जाए और पर्यावरणीय प्रभावों का विस्तृत अध्ययन सार्वजनिक किया जाए.
प्रशासन और CMDC की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस मामले में CMDC अथवा जिला प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है. यदि परियोजनाओं को लेकर आगे कोई निर्णय लिया जाता है, तो उसका असर मैनपाट क्षेत्र के पर्यावरण, पर्यटन और स्थानीय आजीविका पर पड़ सकता है. फिलहाल जनसुनवाई के दौरान हुए विरोध के बाद यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है.
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