अंबिकापुर के प्रवेश द्वार पर गड्ढों का राज! यूथ कांग्रेस ने सड़क पर धान की नर्सरी लगाकर किया प्रदर्शन, प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी
यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन
CG News: सरगुजा संभाग के मुख्यालय अंबिकापुर का प्रवेश द्वार इन दिनों अपनी बदहाल सड़क के कारण चर्चा में है. कटनी-गुमला नेशनल हाईवे-43 पर शहर में प्रवेश करते ही वाहन चालकों का स्वागत बड़े-बड़े गड्ढों से हो रहा है. लगातार बारिश के कारण इन गड्ढों में पानी भर गया है, जिससे सड़क और गड्ढों के बीच अंतर करना भी मुश्किल हो गया है.
हालात ऐसे हैं कि हर दिन हजारों वाहन चालक जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं. सावन के महीने में कांवड़िए भी इसी रास्ते से कैलाश गुफा की ओर जा रहे हैं.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से सड़क की हालत लगातार खराब होती जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग केवल आश्वासन और कागजी कार्रवाई तक सीमित है. सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से उठ रही है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है.
गड्ढों में धान की नर्सरी लगाकर किया अनोखा विरोध
सड़क की जर्जर स्थिति से नाराज यूथ कांग्रेस के पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने शुक्रवार को अनोखा प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बने गहरे गड्ढों में धान की नर्सरी लगाकर नेशनल हाईवे विभाग और प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया. प्रदर्शन के दौरान जमकर नारेबाजी भी की गई. कांग्रेस नेता मनीष दुबे ने कहा कि पिछले एक वर्ष से केवल टेंडर और फाइलों की बातें हो रही हैं, लेकिन सड़क निर्माण के नाम पर धरातल पर एक भी काम दिखाई नहीं दे रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा.
44 करोड़ का टेंडर
वहीं, नेशनल हाईवे विभाग के एसडीओ निखिल लकड़ा ने बताया कि सड़क के पुनर्निर्माण के लिए लगभग 44 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया जा चुका है और ठेकेदार के साथ अनुबंध भी हो चुका है. फिलहाल सड़क को आवागमन योग्य बनाए रखने के लिए मरम्मत कार्य कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि लगातार बारिश के कारण नए सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है.
पिछले वर्ष सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज भी बारिश के दौरान इस सड़क की बदहाल स्थिति का जायजा लेने मौके पर पहुंचे थे. उस समय उन्होंने अधिकारियों को जल्द सड़क निर्माण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे. हालांकि, एक वर्ष बीत जाने के बाद भी सड़क की स्थिति जस की तस बनी हुई है.
लोगों की नजर अब निर्माण कार्य शुरू होने पर
बारिश के मौसम में यह सड़क अब वाहन चालकों के लिए खतरे का कारण बन चुकी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये के टेंडर और विभागीय दावों के बावजूद यदि सड़क की हालत नहीं सुधरती, तो यह प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण है. अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर 44 करोड़ रुपये की यह परियोजना धरातल पर कब उतरती है और अंबिकापुर के प्रवेश द्वार से इन जानलेवा गड्ढों का सफाया कब होगा.
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