प्रयागराज ट्रिपल मर्डर का शॉकिंग सच, दिल दहला देगी उस खौफनाक रात की कहानी

Prayagraj Triple Murder Case: मुकेश के चेहरे पर ना तो खौफ था और ना ही कोई पछतावा और जब मुकेश ने उस रात की कहानी बताई, तो पुलिस के भी होश उड़ गए. क्योंकि किसी को अंदाजा नहीं था कि एक बेटा, एक भाई इतनी हैवानियत कर सकता है.
Prayagraj Triple Murder Case

तीनों मृतक

Prayagraj Triple Murder Case: प्रयागराज का लोकापुर विशानी गांव में रहने वाला मुकुंद अपने पिता के घर पहुंचता है, घर पर ताला लगा हुआ था. पिता रामसिंह बहन साधना और उनकी साथ रहने वाली बड़ी बहन की बेटी आस्था का कोई पता नहीं था. मुकुंद को लगा कि शायद वो बड़े भाई मुकेश के घर होंगी या मुकेश को इनके बारे में कोई जानकारी होगी. मुकुंद अपने भाई के घर पहुंचता है और पूछताछ करता है, लेकिन दोनों में विवाद शुरु हो जाता है. विवाद की वजह पैतृक जमीन और मकान है, जो पिता ने अपने छोटे बेटे मुकुंद के नाम पर दी थी और इस बात से मुकेश नाराज रहता था.

ऐसा लग रहा था जैसे मुकेश गुस्से में भरा बैठा था और उसने देखते ही देखते तमंचे से अपने छोटे भाई मुकुंद पर फायर कर दिया. फायर मिस हो गया गोली मुकुंद की गर्दन को छूकर निकल गई. मुकुंद बाल-बाल बच जाता है, लेकिन ये किसी खौफनाक वारदात का अंत नहीं था. बल्कि एक दस्तक थी, जो बता रही थी कि आगे बहुत कुछ होने वाला है.

मुकुंद अस्पताल जाकर इलाज कराता है और अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद दूसरे दिन वो सीधे थाने पहुंचकर अपने पिता, बहन और भांजी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराता है और अंदेशा जताता है कि इसमें उसके बड़े भाई मुकेश का हाथ हो सकता है.

बिस्तर पर थे खून के निशान

पुलिस हैरान थी, सवाल उठ रहे थे कि कहीं मुकेश ने जिस तरह मुकुंद की जान लेने की कोशिश की है वैसा ही कुछ पिता, बहन और भांजी के साथ तो नहीं किया. ऐसा तो नहीं मुकेश के डर से तीनों घर छोड़कर भाग गए और मोबाइल भी बंद कर लिया. सवाल कई थे, जिनके जवाब की तलाश में पुलिस सीधे पिता रामसिंह के घर पहुुंच जाती है.

घर में अभी भी ताला लगा हुआ था, पुलिस ताला तोड़कर अंदर दाखिल होती है ताकि कुछ सुराग मिल जाए और जैसे ही टीम अंदर दाखिल हुई होश उड़ गए. किसी अननहोनी का अंदेशा सताने लगा क्योंकि घर के अंदर खून बिखरा था. बिस्तर पर भी खून के छींटे थे रामसिंह की शॉल भी खून से लथपथ पड़ी थी, जो इशारा कर रही थी कि इस घर के अंदर किसी खौफनाक वारदात ने दस्तक दी है. पूरे घर के बारीकी से तलाशा जाता है, लेकिन तीनों का कोई पता नहीं चला.

आखिर किसने की हत्या ?

अब सवाल यही था कि आखिर ये खून के छींटे किसके हैं. अगर तीनों के साथ अनहोनी हुई हैं तो फिर लाशें कहां हैं क्या वाकई बड़े बेटे मुकेश ने जमीन के लालच में अपने पिता, बहन और भांजी की जान ले ली या फिर खून से लिखी ये कहानी कुछ और ही है कहानी के सिरे बिखरे हुए थे और अब तलाश मुकेश की थी. क्योंकि शायद उसके पास हर सवाल का जवाब था.

पुलिस की टीमें सक्रिय हो जाती है मुखबिर एक्टिव हो जाते हैं, जगह-जगह तलाशी ली जाती है और फिर अगले दिन यानी 5 जनवरी को पुलिस मुकेश को गिरफ्तार कर लेती है और फिर पूछताछ में जो सामने आता है वो खौफनाक था, इतना खतरनाक था कि पुलिस के भी होश उड़ गए. क्योंकि जिसका अंदेशा था वही हुआ तीनों की हत्या की गई थी और हत्यारा उनका अपना बेटा, अपना भाई और अपना ही मामा मुकेश था, लेकिन सवाल अब यही था कि आखिर उस रात हुआ क्या और तीनों की लाशें कहां हैं.

क्या थी उस रात की कहानी ?

मुकेश के चेहरे पर ना तो खौफ था और ना ही कोई पछतावा और जब मुकेश ने उस रात की कहानी बताई, तो पुलिस के भी होश उड़ गए. क्योंकि किसी को अंदाजा नहीं था कि एक बेटा, एक भाई इतनी हैवानियत कर सकता है. वो तारीख 3 जनवरी 2026 की थी, चारों तरफ घोर सन्नाटा था रात का वक्त था, पूरा गांव कोहरे की चादर में लिपट चुका था, तभी मुकेश अपने पिता के घर पहुंचता है अपनी जमीन की मांग करता है. मुकेश अपने लिए 10 बिस्वा जमीन की मांग कर रहा था, जिसे बेच कर वो नया काम शुरू करना चाहता था, लेकिन उसकी हरकतों को देखते हुए पिता ने जमीन और मकान अपने छोटे बेटे के नाम कर दिया.

तीन हत्याओं को दिया अंजाम

पिता ने जब जमीन देने से इनकार किया तो मुकेश ने अपने पिता रामसिंह की गला दबाकर हत्या की कोशिश की, जिसे उसकी बहन साधना और भांजी आस्था ने देख लिया. मुकेश गुस्से में हैवान बन चुका था. बहन और भांजी ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन रुकने के बजाय उसने पास में ही पड़ी कुल्हाड़ी से बहन और भांजी पर भी हमला कर दिया और एक-एक कर तीनों की हत्या कर दी.

लाशों को कुएं में फेंक दिया

मुकेश की आंखों के सामने उसके अपनों की लाशें पड़ी थी लेकिन वो डरा नहीं बल्कि शांति से बैठकर उन्हें देखता रहा. पांच घंटे तक लाशों के पास बैठा रहा और जब बाहर निकला तो घना कोहरा था, कोहरा इतना घना था कि 5 मीटर तक भी दिखाई नहीं दे रहा था और उसे लाशों को ठिकाने लगाने का मौका मिल गया. धुंध का फायदा उठाते हुए बाइक से एक कर तीनों के शव पास में एक सूखे कुएं के पास ले गया और लाशों को कुएं में फेंक दिया और किसी को कुछ पता ना चले इसके लिए लाशों के ऊपर पराली डाल दी.

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हत्यारा सलाखों के पीछे

पुलिस ने हत्यारे की निशानदेही पर तीनों लाशों के कुएं से बाहर निकाल लिया है. हत्या में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी और तमंचा भी बरामद कर लिया है. हत्या का पर्दाफाश हो चुका है. हत्यारा सलाखों के पीछे हैं.

यह वारदात झंकझोर कर रख दिया

इस वारदात ने हर किसी को झंकझोर कर रख दिया है. किसी को अंदाजा नहीं था कि जमीन का एक टुकड़ा तीन-तीन लोगों की जान ले लेगा. किसी को अंदाजा नहीं था कि मकान के लिए मकान को ही श्मशान बना दिया जाएग और ये करने वाला कोई और नहीं बल्कि उनका अपना ही होगा.

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