Ghooskhor Pandat Film Controversy: ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर नहीं थम रहा विवाद, अब निर्माता-निर्देशक समेत Netflix को नोटिस

Ghooskhor Pandat Film Controversy: मनोज बाजपेयी द्वारा अभिनीत आने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडत' पर एक नए विवाद ने जन्म ले लिया है, मध्य प्रदेश के जबलपुर कोर्ट द्वारा निर्माता, निर्देशक और Netflix के अधिकारियों को नोटिस भेजा गया है.
Ghooskhor Pandit film controversy

Ghooskhor Pandit film controversy

Ghooskhor Pandat Film Controversy: मनोज बाजपेयी की आने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. हालांकि फिल्म का नाम भी बदलने की ऐलान कर दिया गया है इसके बाद भी मामला कोर्ट में पहुंच गया है और इससे जुड़ी कानूनी कार्यवाई भी तेज हो गई है. मध्य प्रदेश की जबलपुर न्यायालय ने परिवाद पर सुनवाई करते हुए फिल्म के निर्माता- निर्देशक समेत ओटीटी प्लेटफॉर्म Netflix को भी नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है.

परिवादी वैभव पाठक का बयान दर्ज

जबलपुर के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी पंकज सविता की अदालत में सोमवार को परिवादी वैभव पाठक का बयान दर्ज किया गया है. परिवादी ने समाज के एक वर्ग की भावना आहत होने का आरोप लगाते हुए इस मामले को गंभीर और सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दा बताया है. वैभव पाठक ने इस फिल्म के विवादित शीर्षक का विरोध करते हुए इसे ब्राह्मण समुदाय की गरिमा पर प्रहार बताया गया है. अदालत ने परिवादी का बयान सुनने के बाद फिल्म के निर्माताओं और निर्देशक समेत Netflix के नाम नोटिस जारी करने के निर्देश दिए.

अदालत ने इन लोगों को भेजा नोटिस

अदालत द्वारा जिन लोगों को नोटिस भेजा गया हैं उनमें Netflix (USA) के अध्यक्ष रीड हेस्टिंग्स, सह‑मुख्य कार्यकारी अधिकारी टेड सरंदास, मुख्य सामग्री अधिकारी बेला बजरिया और Netflix इंडिया की उपाध्यक्ष मोनिका शेरगिल शामिल हैं. अदालत ने इन सभी से इस मालमें जवाब भी मांगे हैं. दूसरी तरफ परिवादी की तरफ से पैरवी करने वाले अधिवक्ता असीम त्रिवेदी ने कहा कि भले ही शीर्षक बदलने की प्रक्रिया चल रही हो, लेकिन इससे पहले किए गए प्रचार-प्रसार ने एक बड़े वर्ग को चोट पहुंचाई हैं. इसकी भरपाई केवल नाम बदलने भर से नहीं की जा सकती.

पंडित शब्द को “घूसखोर” जैसे नकारात्मक शब्द के साथ जोड़ना न केवल एक काल्पनिक चरित्र का चित्रण है, बल्कि पूरे समुदाय की सामाजिक छवि को प्रभावित करता है. परिवादी का कहना है कि मामला केवल शीर्षक का नहीं बल्कि एक वर्ग के सम्मान और पहचान से जुड़ा हुआ है.

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