घूमने के शौकीनों के लिए बजट 2026 में क्या? ईको टूरिज्म-धार्मिक पर्यटन को लेकर वित्त मंत्री ने की बड़ी घोषणा

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में टूरिज्म सेक्टर के लिए भी कई बड़े ऐलान किए हैं. ईको टूरिज्म और धार्मिक पर्यटन पर काफी फोकस किया गया है.
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टूरिज्म बजट 2026

Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 पेश कर दिया है. इस बजट में पर्यटन पर भी फोकस किया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए बताया कि पूर्वोत्तर के 6 राज्यों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिसका नाम बौद्ध सर्किट रहेगा. वहीं, टूरिज्म और हॉस्पिटलिटी को बढ़ावा देने के लिए ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी’ की स्थापना की भी घोषणा की.

बौद्ध सर्किट कॉरिडोर क्या है?

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतामरण पूर्वोत्तर के छह राज्यों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक कॉरिडोर का ऐलान किया है.
  • इस कॉरिडोर का नाम बौद्ध सर्किट रखा गया है. यह अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बनाया जाएगा.
  • धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन स्थलों के पास इंटरप्रिटेशन सेंटर्स की स्थापना की जाएगी.
  • यहां उन जगहों के इतिहास और महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी.
  • साथ ही तीर्थ यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा.

‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी’ की स्थापना

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए ऐलान किया कि ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी’ की स्थापना की जाएगी. यहां होटल और आतिथ्य क्षेत्र में इंटरनेशनल लेवल की ट्रेनिंग दी जाएगी.

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टूरिज्म सेक्टर को बजट में क्या-क्या मिला?

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पर्यटन स्थलों पर गाइडों को ट्रेन करने की घोषणा की है.
  • 20 पर्यटन स्थलों पर 10 हजार गाइडों को ट्रेन करने के लिए एक पायलट योजना शुरू की जाएगी.
  • इस योजना के तहत 12 हफ्ते तक ट्रेनिंग दी जाएगी.
  • पुरातात्विक स्थलों को सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों के रूप में डेवलप किया जाएगा.
  • लोथल, धौलावीरा, राखीगढ़ी, आदिचनल्लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस सहित 15 पुरातात्विक स्थलों को जीवंत तरीके से विकसित किया जाएगा.
  • ‘इको-टूरिज्म’ और प्रकृति आधारित यात्रा पर बड़ा निवेश का ऐलान किया गया है.
  • हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के बर्फीले रास्तों से लेकर दक्षिण भारत की अराकू घाटी और पुदिगई मलाई की पहाड़ियों तक सुरक्षित और टिकाऊ पहाड़ी रास्ते विकसित किए जाएंगे.

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