‘खैरात नहीं है आरक्षण…’, चिराग पासवान ने दी जंतर-मंतर के प्रदर्शनकार‍ियों को सलाह, क्या-क्‍या कहा?

Chirag Paswan reservation: केंद्रीय मंत्री च‍िराग पासवान ने भी आरक्षण को लेकर अपना स्‍टैंड क्‍लीयर कर द‍िया है. उन्‍होंने कहा कि आरक्षण कोई खैरात नहीं, संवैधानिक अधिकार है.
चिराग पासवान

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Chirag Paswan Reservation: आरक्षण को लेकर इन दिनों जमकर सियासी बयानबाजी हो रही है. कोई इसे सही तो कोई अपना अध‍िकार तो कई लोग इसमें बदलाव की मांग कर रहे हैं. आरक्षण में बदलाव को लेकर हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर जमकर प्रदर्शन देखने को मिला. जिस पर तमाम राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी प्रतिक्रिया रही. इन सब के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण कोई खैरात नहीं, संवैधानिक अधिकार है.

आरक्षण खत्म करने की लगातार मांगों और शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बीच, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस आरक्षण का समर्थन किया है. आगे कहा कि आरक्षण देने के पीछे का मकसद उन समुदायों के लोगों को मुख्यधारा में लाना रहा है जिन्होंने किसी न किसी वजह से भेदभाव का सामना किया है.

उन्होंने कहा कि इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग शामिल हैं. अनुसूचित जाति क्या है? ये वे जातियां हैं जिन्हें संविधान में सूचीबद्ध किया गया है, और उनकी पहचान का आधार छुआछूत रहा है. उन्होंने आगे कहा, “उन्हें उसी आधार पर पहचाना गया और अनुसूची में शामिल किया गया, और फिर इन जातियों को आरक्षण दिया गया.

पासवान ने आरक्षण पर क्‍या-क्‍या कहा?

चिराग पासवान ने बताया कि समाज के इन वर्गों के लोगों की पहचान की गई. उन्हें मुख्यधारा के समाज में लाने के लिए प्रावधान किए गए. यह सब बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा भारत के संविधान में शामिल किए गए आरक्षण के जरिए किया गया. उन्होंने कहा कि समय के साथ इन प्रावधानों को और मजबूत किया गया है. अब ऊंची जातियों के गरीब लोग भी आरक्षण का लाभ उठाने के पात्र हैं.

आगे कहा कि इसलिए, जब आरक्षण का दायरा इतना व्यापक हो गया है, तो कोई भी व्यक्ति जो इसे सिर्फ़ खत्म करना चाहता है या ऐसा सोचता है, वह ऐसा नहीं कर सकता है. यह एक संवैधानिक अधिकार है, और उचित विचार-विमर्श और बहस के बिना इसे खत्म करने का सवाल ही नहीं उठता है.

प्रदर्शनकारियों को पासवान की सलाह

चिराग पासवान ने दिल्ली के जंतर पर चल रहे प्रदर्शनकारियों को लेकर बात की है. उन्‍होंने कहा कि आरक्षण-विरोधी प्रदर्शनकारी अपनी मांगें व्यवस्थित तरीके से रखेंगे, तो सरकार उनसे बातचीत करेगी. आगे कहा कि आरक्षण को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी देश की आबादी के एक बड़े हिस्से में गुस्सा पैदा कर सकती है.

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