Orange Economy: क्या है ऑरेंज इकोनॉमी? वित्त मंत्री ने बजट के दौरान किया जिक्र, 20 लाख प्रोफेशनल्स की होगी जरूरत!
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
Orange Economy: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार 9वीं बार यूनियन बजट संसद में पेश कर इतिहास रच दिया है. बजट के दौरान उन्होंने कई अहम घोषणाएं की. वित्त मंत्री ने शिक्षा से लेकर डिफेंस तक तमाम अलग-अलग क्षेत्रों में कई ऐलान किए. इस दौरान उन्होंने एक ऐसी चीज का जिक्र किया, जिसकी अब चर्चा की जा रही है. निर्मला सीतारमण ने बजट के दौरान ऑरेंज इकोनॉमी का जिक्र किया. क्या होती है ये ऑरेंज इकोनॉमी?
क्या है ‘ऑरेंज इकोनॉमी’?
औरेंज इकोनॉमी को क्रिएटिव इकोनॉमी भी कहते हैं. ऑरेंज इकोनॉमी में संस्कृति, सामाजिक रचनात्मकता, टेक्नोलॉजी और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) जैसे कई पहलू शामिल होते हैं. इसमें इनोवेशन और क्रिएटिव शामिल होते हैं. इसलिए इसे ऑरेंज इकोनॉमी कहा जाता है.
भारत के लिए क्यों है ऑरेंज इकोनॉमी की अहमियत?
दुनिया भर में क्रिएटिव उद्योगों का जीडीपी में योगदान 0.5% से 7% तक होता है. भारत भी इसमें अब अग्रणी भूमिका निभाना चाहता है. भारत के पास एक बड़ी युवा आबादी है. डिजिटल युग में प्रवेश करने के साथ ही देश में तेजी से शहरीकरण हो रहा है. ऐसे में भारत इसमें शामिल होकर अपनी विकास की रफ्तार को आगे बढ़ाना चाहता है.
‘2030 तक लगभग 20 लाख प्रोफेशनल्स की जरूरत का अनुमान’
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण में ऑरेंज इकोनॉमी का जिक्र किया. निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘देश में एनीमेशन, मिंग और कॉमिक्स (AVGC) क्षेत्र एक तेजी से बढ़ता हुआ उद्योग है. इसमें साल 2030 तक 20 लाख प्रोफेशनल्स की जरूरत का अनुमान है.’ वित्त मंत्री ने आगे कहा कि मैं मुंबई स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज के सहयोग से 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने का प्रस्ताव रखती हूं.
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