Vistaar NEWS

पता बदलने पर फॉर्म-6 क्यों भरें? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा क्‍लीयर जवाब

soupreme court

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछे सवाल

SC ECI Form 6: दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कई सवाल पूछे हैं. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि जिन मतदाताओं का नाम पहले से वोटर लिस्ट में है. लेकिन, पता बदल गया है, उन्हें नया वोटर मानकर फॉर्म-6 भरने के लिए क्यों कहा जा रहा है? कोर्ट ने ऐसे मतदाताओं को फॉर्म-8 भरने का मौका देने पर जोर दिया है.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों ने अभी तक एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं किया है या पता बदलने के बाद जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं की है. उन्हें एक और मौका मिलना चाहिए. कोर्ट का कहना था कि मतदाताओं को नियमों के तहत सही फॉर्म भरने की सुविधा दी जानी चाहिए. ताकि किसी को अनावश्यक परेशानी न हो.

43 लाख नामों के अंतर को कम करने पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वोटर लिस्ट में करीब 43 लाख नामों के अंतर को कम करने की दिशा में प्रयास किए जाएं. कोर्ट ने सुझाव दिया कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं. उनके नामों की जानकारी सार्वजनिक की जाए. साथ ही यह भी बताया जाए कि उनका नाम पिछली वोटर लिस्ट में कहां दर्ज था. इससे संबंधित मतदाता अपनी स्थिति की जांच कर सकेंगे. जरूरत पड़ने पर आयोग से संपर्क कर सकेंगे.

लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी पर बाद में सुनवाई

सुनवाई में वकील प्रशांत भूषण ने चुनाव आयोग की प्रेस रिलीज का हवाला देते हुए बताया कि 13 लाख लोगों के नाम अनमैप्ड हैं, जबकि 19 लाख मामलों में लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी सामने आई है. लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी का मतलब वोटर के रिकॉर्ड में ऐसी जानकारी होना है, जिस पर आयोग को स्पष्टीकरण चाहिए.

इस पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सवाल किया कि जब 2003 की वोटर लिस्ट को मैपिंग के लिए आधार बनाया गया है, तो उसमें पहले से दर्ज नामों की दोबारा जांच क्यों की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई दो हफ्ते बाद करने का फैसला किया.

ये भी पढ़ें:कर्नाटक MLC चुनाव में BJP-JDS का क्लीन स्वीप, BJP बोली- इससे भी नहीं जीती कांग्रेस

Exit mobile version