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मिडटर्म चुनाव हारते ही एक्शन में ट्रंप, 9 भारतीय कंपनियों पर लगाया बैन, ईरान के तेल से है कनेक्शन

Donald trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

Iran Oil Trade Crackdown: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भले ही मिडटर्म चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद वे एक्शन मोड में हैं. बुधवार को अमेरिका ने भारत और तुर्किए से जुड़ी कई कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं. उन पर आरोप है कि वे ईरान के तेल जहाजों को दूसरे देशों को बताकर चलाते थे, जिसकी वजह से ईरान को आर्थिक मदद मिली. इस कार्रवाई में चंडीगढ़ का एक कारोबारी परिवार और उसके साथ दो अन्य भारतीय लोग शामिल हैं. अमेरिका ने यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत की है.

डोनाल्ड ट्रंप ने मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले ही ईरान के केशम द्वीप पर हमला कर दिया था. लेकिन जब रिजल्ट आया तो चौंकाने वाला रहा, क्योंकि ट्रंप की पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा. रिजल्ट आते ही ट्रंप एक्शन मोड में आ गए और ईरान के तेल जहाजों की मदद करने वालों पर शिकंजा कस दिया.

9 भारतीय कंपनियों पर बैन

अमेरिका का आरोप है कि ईरान के तेल को फर्जी कागजात के माध्यम से दूसरे देशों के नाम पर भेजने में मदद की. इस पूरे मामले में जहाजों की पहचान छिपाने से लेकर उनके रजिस्ट्रेशन तक का खेल सामने आया है. जिसमें अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भारत के जुड़े कुल 9 संस्थानों पर बैन लगा दिया है. वहीं, एक तुर्किए की कंपनी पर भी कार्रवाई की गई है.

ईरान को आर्थिक मदद पहुंचाने का आरोप

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस कार्रवाई में चंडीगढ़ के बिजनेसमैन सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीति प्रीति शाहिद का नाम शामिल हैं. इसके अलावा 2 अन्य भारतीय (अश्वनी कुमार धीमान और इशविंदर सिंह) की भूमिका सामने आई है. इन्होंने वेबसाइटों के माध्यम से जहाजों का रजिस्ट्रेशन, नाविकों की ट्रेनिंग, सर्टिफिकेट जारी करने और जहाजों की जांच जैसी सेवाएं देने का दावा किया और ईरान को फर्जी तरीके से आर्थिक मदद पहुंचाई.

ईरान की मदद करने वालों पर होगी कार्रवाई

अमेरिका का आरोप है कि ईरान का तेल ले जाने वाले जहाजों को ऐसे देशों के फर्जी रजिस्ट्रेशन दिए, जिनकी सरकार ने मंजूरी तक नहीं दी थी. फिलहाल, अब पकड़े जाने के बाद कंपनियों की संपत्तियों को फ्रीज करने की कार्रवाई की जा सकती है. इतना ही नहीं, अमेरिका का कहना है कि ईरान की मदद करने वालों को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

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