लवली आनंद से लेकर बीमा भारती तक…पत्नी के सहारे लोकसभा पहुंचने की चाहत में बिहार के ये बाहुबली

2024 के लोकसभा चुनाव में भी कई ऐसे बाहुबली नेता हैं जो खुद तो चुनाव नहीं लड़ सकते, मगर अपनी पत्नी को आगे कर लोकसभा तक पहुंचने की चाहत पाले हुए हैं. इस बार भी कई बाहुबली नेताओं ने अपनी पत्नी को पार्टी का टिकट दिला दिया है.

बिहार में बाहुबलियों ने अपनी पत्नी को चुनावी समर में उतारा

बिहार में बाहुबलियों ने अपनी पत्नी को चुनावी समर में उतारा

Bihar Politics: बाहुबल और बाहुबली…बिहार की राजनीति में दशकों से हावी रहे हैं. गुंडई से नेता नगरी तक का सफर पूरा कर यही बाहुबली बाद में कौम के मसीहा भी बनते रहे. बाहुबली नेताओं का जोर तो बिहार की राजनीति में रहा ही है, लेकिन जब खुद की दाल नहीं गली तो यही लोग अपनी पत्नियों को सियासत में आगे करते रहे. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी कई ऐसे बाहुबली नेता हैं जो खुद तो चुनाव नहीं लड़ सकते, मगर अपनी पत्नी को आगे कर लोकसभा तक पहुंचने की चाहत पाले हुए हैं. इस बार भी कई बाहुबली नेताओं ने अपनी पत्नी को पार्टी का टिकट दिला दिया है. चुनावी समर में तो ये संदेश देने की कोशिश हो रही है कि इनकी पत्नी मैदान में हैं, मगर असल में तो चुनाव तो वो खुद लड़ रहे हैं. आइये यहां उन 5 बाहुबली नेता के बारे में बताते हैं जिन्होंने अपनी पत्नी को चुनावी मैदान में उतारा है.

लवली आनंद

बाहुबली नेता आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद भी इस बार लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं. साल 1996 और 1998 में शिवहर का प्रतिनिधित्व करने वाले आनंद मोहन को 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी कृष्णा लाह की हत्या के मामले में 16 साल तक जेल में रहने के बाद पिछले साल अप्रैल में ही रिहा किया गया था. तत्कालीन नीतीश के नेतृत्व वाली ग्रैंड अलायंस सरकार ने जेल मैनुअल में कुछ बदलाव लाने के बाद उनकी रिहाई संभव हो गई. आनंद मोहन चुनाव नहीं लड़ सकते क्योंकि नियम दो साल से अधिक की सजा काट चुके दोषियों को उनकी रिहाई के छह साल बाद तक चुनाव लड़ने से रोकते हैं. इसलिए मोहन ने लोकसभा चुनाव में लवली आनंद को शिवहर से जेडीयू का टिकट दिलाया है.

बीमा भारती

अगले नंबर पर पूर्णिया के बाहुबली नेता अवधेश मंडल हैं. उनकी पत्नी बीमा भारती, जो पांच बार विधायक और पूर्व मंत्री हैं. हाल ही में नीतीश की जेडीयू पार्टी से नाता तोड़ राजद में शामिल हुई थी. अब उन्हें RJD ने पूर्णिया लोकसभा सीट से टिकट दिया है. मंडल पर हत्या और अपहरण सहित 12 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं.

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विजयलक्ष्मी देवी

पूर्व विधायक रमेश कुशवाहा ने पत्नी विजयलक्ष्मी देवी को जदयू के टिकट पर सीवान से मैदान में उतारा है. सीपीआई-एमएल से जुड़े रहे कुशवाहा तब फेमस हुए थे, जब उन्होंने 1997 में जेएनयू के छात्र नेता चन्द्रशेखर प्रसाद की हत्या के सिलसिले में सीवान के तत्कालीन सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की. अभी सीवान का प्रतिनिधित्व लोकसभा में जदयू नेता कविता सिंह कर रही हैं, जो डॉन से नेता बने अजय सिंह की पत्नी हैं.

अर्चना रविदास

जमुई से राजद नेता मुकेश यादव ने अपनी पत्नी अर्चना रविदास को टिकट दिलाया है. उनका मुकाबला एलजेपी (रामविलास) उम्मीदवार अरुण भारती से होगा, जो पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान के बहनोई हैं. सहानुभूति हासिल करने के लिए अर्चना मुकाबले को ‘स्थानीय बनाम बाहरी’ बनाने की कोशिश कर रही हैं.

कुमारी अनिता

आखिरी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण, नवादा के कद्दावर नेता अशोक महतो हैं जिन्होंने अपनी पत्नी को कुमारी अनिता को आरजेडी के टिकट पर मुंगेर से मैदान में उतारा है. महतो हाल ही में अनिता के साथ शादी के बंधन में बंधे हैं. वह खुद चुनाव नहीं लड़ सकते क्योंकि 2001 के जेलब्रेक मामले में 17 साल जेल में रहने के बाद उन्हें पिछले साल रिहा कर दिया गया था.

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