दिवाली का त्योहार नजदीक है ऐसे में हर शहर, गली-मोहल्ले में दीपावली को लेकर तैयारियां चल रही हैं. लोग अपने घरों की साफ-सफाई और रंगाई-पुताई करने में व्यस्त हैं, तो वहीं बच्चों में भी इस त्योहार को लेकर जमकर उत्साह रहता है. दिवाली पर लोग एक-दूसरे को मिठाई बांटकर, पटाखे जलाकर खुशियां मनाते हैं. मध्य प्रदेश सरकार ने आगामी त्योहारों को देखते हुए कार्बाइड गन की बिक्री और उपयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है.
एमपी में पूरी तरह से प्रतिबंधित
यह वही कार्बाइड गन है जिसकी वजह से पिछले साल दिवाली के मौके पर मध्य प्रदेश में करीब 300 बच्चों की आंखों को नुकसान हुआ था. कई मासूमों की आंखों की रोशनी तक चली गई थी. सीएम मोहन यादव ने सभी जिला प्रशासनों को निर्देश दिया है कि सुनिश्चित करें कि त्योहारों के दौरान कार्बाइड गन और कार्बाइड लैंप का उपयोग न हो, क्योंकि लोकल मेड कार्बाइड गन और कार्बाइड लैंप मानवों के लिए बेहद खतरनाक होते हैं.
300 बच्चों की आंखों में दिक्कत
पिछले साल मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में इसी कार्बाइड गन की वजह से करीब 300 बच्चों की आंखों में चोटें आई थीं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर ये कार्बाइड गन होती क्या है और कैसे बनती हैं साथ ही इससे क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं?
क्या है कार्बाइड गन?
दरअसल ये एक तरह की देसी गन होती है. इसे बनाने के लिए PVC पाइप, गैस लाइटर और कैल्शियम कार्बाइड के टुकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है. जब पाइप के अंदर कैल्शियम कार्बाइड में कुछ बूंदें पानी की डाली जाती हैं, तो रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण एसिटिलीन गैस बनती है. इसके बाद पाइप के पीछे लगे लाइटर से इसे चिंगारी दी जाती है, जिसकी वजह से जोरदार धमाका होता है और पाइप से चिंगारी भी बाहर निकलती है.
किसानों द्वारा इस्तेमाल
दरअसल इसका इस्तेमाल किसान खेतों में अपनी फसल की सुरक्षा करने के लिए करते थे. इसकी तेज आवाज खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जानवरों, बंदरों और पक्षियों को डराने और भगाने में काफी असरदार होती है.
कार्बाइड गन से होने वाले नुकसान
आंखों को नुकसान- कार्बाइड गन के इस्तेमाल से सबसे ज्यादा आंखों को नुकसान होता है. इसके धमाके से निकलने वाली गैसें, कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड के अवशेष और तेज धमाके से आंखों में गंभीर केमिकल बर्न (अल्कली बर्न) हो जाते हैं. इससे कॉर्निया झुलस सकता है, आंख की पुतली फट सकती है, और कई मामलों में आंशिक या पूरी तरह से आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली जाती है.
त्वचा पर जलने के घाव- इस गन में कैल्शियम कार्बाइड और पानी की प्रतिक्रिया से एसिटिलीन गैस बनती है, जिसका धमाका होने पर चेहरे, हाथ और त्वचा पर थर्मल बर्न (जलने) के गहरे जख्म हो सकते हैं.
प्लास्टिक या मेटल के टुकड़ों से चोट- धमाके के कारण प्लास्टिक पाइप या मेटल के टुकड़े टूटकर या बिखरकर तेजी से बाहर निकलते हैं, जो चेहरे, आंख, कान और शरीर के अन्य हिस्सों में घुसकर गंभीर घाव पैदा कर सकते हैं.
सुनने की क्षमता प्रभावित- गन से होने वाला अचानक और अत्यधिक तेज धमाका कानों के परदे को नुकसान पहुँचा सकता है, जिससे सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है.
