मीनाक्षी-महेश के बीच टक्‍कर! कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर, नंबर गेम बनेगा मुसीबत? क्‍या कहते हैं समीकरण

MP Rajya Sabha Elections: मध्य प्रदेश की तीसरी राज्‍यसभा सीट के लिए बीजेपी ने उम्मीदवारों का ऐलान कर द‍िया है. इसके साथ ही कांग्रेस को अब क्रॉस वोटिंग का डर सताने लगा है. ऐसे हम आपको पूरा नंबर गेम समझाते हैं.
महेश केवट और मीनाक्षी नटराजन

महेश केवट और मीनाक्षी नटराजन

Meenakshi & Mahesh Election Battle: मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर तेज हो चली है. इसके पीछे की वजह राज्यसभा सीट है. बीजेपी ने पहले ही दो सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर द‍िया था. कांग्रेस ने अपनी एक सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है. पहले सब कुछ सामान्‍य नजर आ रहा था. लेकिन, रविवार शाम को बीजेपी ने तीसरी सीट पर उम्मीदवार के तौर पर महेश केवट के नाम का ऐलान कर दिया. इसके बाद से ही पूरा सियासी माहौल बदल गया.

भारतीय जनता पार्टी ने रविवार देर रात मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को तीसरी सीट के लिए उम्मीदवार बनाया है. उन्हें हाल ही में कल्‍याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था. दूसरी तरफ कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन का नामांकन दाखिल कराने के लिए पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कर्नाटक-तेलंगाना के पीसीसी चीफ भी विधानसभा जाएंगे.

शनिवार को भाजपा उम्मीदवार तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था. अब आज यानी कि सोमवार को तीसरा उम्‍मीदवार भी नामांकन दाखिल करेगा.

राज्‍यसभा की तीसरी सीट के लिए क्‍या है जरूरी गण‍ित?

मध्यप्रदेश विधानसभा में इस समय 228 प्रभावी विधायक मौजूद हैं. एक राज्‍यसभा सीट पर जीत के लिए प्रत्याशी को 58 वोटों की जरूरत होगी. कुल विधायकों में से बीजेपी के पास 164 विधायक मौजूद हैं, जबकि कांग्रेस के पास 63 प्रभावी विधायक हैं. नंबर गेम से देखे तो 2 सीट पर बीजेपी और 1 सीट पर कांग्रेस आसानी से जीत दर्ज कर सकती है. लेकिन तीसरी सीट के लिए बीजेपी के पास 48 विधायक मौजूद हैं. बीएपी पार्टी से भी एक विधायक हैं. माना जा रहा है कि बीजेपी उन्हें अपने पाले में ला सकती है. मतलब अगर यह समीकरण ठीक बैठता है तो बीजेपी को केवल 9 और वोटों की जरूरत होगी.

अगर भारतीय जनता पार्टी 9 विधायकों से क्रॉस वोटिंग कराने में सफल रहती है तो कांग्रेस के हाथ से यह सीट जा सकती है. यही वजह है कि कांग्रेस अपने विधायकों की सुरक्षा में लग गई है. मतलब यह कि प्रदेश में एक बार फ‍िर रिसॉर्ट राजनीति का दौर शुरू हो सकता है. कहा यह भी जा रहा है कि कांग्रेस अपने विधायकों को किसी अन्‍य राज्‍य में शिफ्ट कर सकती है.

कौन हैं महेश केवट?

महेश केवल मूलरूप से बुंदेलखंड अंचल से आते हैं. वे निवाड़ी जिले के रहने वाले हैं. वे इस समय मध्यप्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं. महेश लंबे समय से बीजेपी के साथ काम कर रहे हैं. महेश केवट को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने मछुआरा वर्ग को संदेश दिया है. भाजपा के जिला मंत्री, जिला उपाध्यक्ष और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में संगठन में कई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियां निभाईं हैं. 

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