‘ट्रैक्टर छोड़ने वाले कलेक्टर कौन होते हैं’? नायब तहसीलदार पर अवैध वसूली का आरोप; DM के आदेश की धज्जियां उड़ाई!

पीड़ित महेंद्र वर्मा का आरोप है कि नायब तहसीलदार ने उनके साथ न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए कहा कि ट्रैक्टर लेकर कहां जा रहे हो. इसे किसके आदेश पर निकाल कर ले हो. संबंधित के द्वारा भरे गए चालान पर कलेक्टर साहब के आदेश संबंधी जानकारी दिखाई गई. जिसके बाद रामदास गोरले द्वारा ट्रैक्टर छोड़ने के बदले 10,000 रुपये की मांग की गई.
In Sehore, a Naib Tehsildar is accused of seizing a tractor in violation of the Collector's orders.

सीहोर में नायब तहसीलदार पर कलेक्टर के आदेशों का उल्लंघन करके ट्रैक्टर जब्त करने का आरोप. सीहोर में नायब तहसीलदार पर कलेक्टर के आदेशों का उल्लंघन करके ट्रैक्टर जब्त करने का आरोप.

Input- अक्षय शर्मा

Sehore News: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भैरूंदा क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारियों की ‘अफसरशाही’ और ‘अवैध वसूली’ का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां भेरूंदा के नायब तहसीलदार रामदास गोरले पर शासकीय मर्यादाओं को ताक पर रखकर, न केवल अवैध वसूली करने बल्कि जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी कलेक्टर के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाने के गंभीर आरोप लगे हैं.

‘कलेक्टर कौन होते हैं ट्रैक्टर छोड़ने वाले?’

ताजा घटनाक्रम के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है, जहां एक नायब तहसीलदार ने खुलेआम कह दिया कि कलेक्टर कौन होते हैं ट्रैक्टर छोड़ने वाले? प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को रेत व्यापारी महेंद्र वर्मा कलेक्टर के निर्देशानुसार बाकायदा चालान की राशि जमा कर, उनके वैध आदेश पत्र के साथ अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली को भैरूंदा थाने से छुड़ाकर वापस ला रहे थे. जब ट्रैक्टर लाड़कुई के समीप पहुंचा, तो वहां निजी वाहन में सवार नायब तहसीलदार रामदास गोरले ने उसे रोक लिया.

पीड़ित महेंद्र वर्मा का आरोप है कि नायब तहसीलदार ने उनके साथ न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए कहा कि ट्रैक्टर लेकर कहां जा रहे हो. इसे किसके आदेश पर निकाल कर ले हो. संबंधित के द्वारा भरे गए चालान पर कलेक्टर साहब के आदेश संबंधी जानकारी दिखाई गई. जिसके बाद रामदास गोरले द्वारा ट्रैक्टर छोड़ने के बदले 10,000 रुपये की मांग की गई.

नशे में धुत थे नायब तहसीलदार

महेंद्र बताते हैं कि नायब तहसीलदार बेहद ही नशे में धुत थे और लगातार अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए पैसे की मांग कर रहे थे. जब उन्होंने पैसे देने से इनकार कर दिया तो उन्होंने ट्रैक्टर को थाने में ले जाकर खड़ा कर दिया. जबकि मैं उनसे बार बा कह रहा था कि में चलानी राशि जमा करके ही कलेक्टर साहब के आदेश पर ही भेरूंदा से ट्रैक्टर छुड़वाकर लाया हूं और भारुंदा थाने वाले बिना चालान जमा किया. वैसे ही ट्रैक्टर नहीं छोड़ते हैं मेरे द्वारा चालान भर दिया गया है. लेकिन उन्होंने मेरी एक न सुनी और कहा गया कलेक्टर साहब कौन होते हैं ट्रैक्टर छोड़ने वाले, कलेक्टर साहब को मैं कुछ नहीं समझता हूं. आपको मुझे पैसे देने पड़ेंगे नहीं तो ट्रैक्टर को यहीं पर खड़ा कर दो और उन्होंने मेरा ट्रैक्टर थाने में खड़ा करवा दिया.

कलेक्टर के आदेश को भी नकारा

पीड़ित व्यापारी महेंद्र वर्मा ने बताया कि खनिज विभाग का चालान जमा कर कलेक्टर साहब का वैध आदेश पत्र दिखाया जाता रहा, लेकिन आरोप है कि नायब तहसीलदार उस वक्त कथित तौर पर नशे की हालत में इस कदर चूर थे कि उन्होंने साफ कह दिया. ‘कलेक्टर कौन होता है ट्रैक्टर छोड़ने वाले? जब तक मुझे पैसे नहीं दोगे, गाड़ी नहीं छूटेगी.’ जब पीड़ित ने इस पूरी धांधली और अवैध वसूली का विरोध करते हुए अपने मोबाइल से वीडियो बनाने का प्रयास किया, तो नायब तहसीलदार ने उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया. इसके बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली को जबरन जब्त कर लाड़कुई पुलिस थाने में खड़ा करवा दिया गया.

पीड़ित ने CM हेल्पलाइन 181 पर शिकायत

इस घटना से प्रताड़ित होकर रेत व्यापारी महेंद्र वर्मा ने मामले की लिखित शिकायत और सीएम हेल्पलाइन 181 पर अपनी गुहार दर्ज कराई है. शिकायत दर्ज होने के बाद से ही इलाके में हड़कंप मचा है. पीड़ित का आरोप है कि अब नायब तहसीलदार के करीबी और कुछ निजी लोग उन पर लगातार शिकायत वापस लेने और ‘समझौते’ के लिए मानसिक दबाव बना रहे हैं.

नियमों को ताक पर रख चल रहा वसूली का खेल

भैरूंदा से लेकर लाड़कुई तक के पूरे क्षेत्र में यह कोई पहला मामला नहीं है. स्थानीय लोगों और छोटे व्यापारियों का आरोप है कि क्षेत्र में नायब तहसीलदार, कुछ चुनिंदा पटवारी और उनके निजी गुर्गे बिचौलिए मिलकर एक संगठित सिंडिकेट चला रहे हैं. रेत का कारोबार करने वाले छोटे ट्रैक्टर-ट्रॉली चालकों को डरा-धमकाकर आए दिन इसी तरह अवैध वसूली की जाती है.

क्या कहती है शासन की गाइडलाइन?

मध्य प्रदेश शासन की स्पष्ट गाइडलाइन है कि खनिज परिवहन पर खनिज विभाग के अलावा कोई भी अकेला विभाग सीधे कार्रवाई नहीं कर सकता. नियमों के मुताबिक, किसी भी प्रकार की कार्रवाई के लिए खनिज (माइनिंग) ,राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम का होना अनिवार्य है। लेकिन भैरूंदा क्षेत्र में राजस्व के अधिकारी इन सभी नियमों को ठेंगा दिखाकर अकेले ही कार्रवाई के नाम पर अवैध वसूली को अंजाम दे रहे हैं।

राजस्व मंत्री के गृह जिले का यह हाल

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सीहोर जिला प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का गृह जिला है. उनके अपने ही क्षेत्र में राजस्व विभाग के छोटे-बड़े अधिकारियों द्वारा इस तरह सरेआम भ्रष्टाचार और अवैध वसूली को अंजाम देना, शासन-प्रशासन की साख पर गंभीर सवाल खड़े करता है. अब देखना यह होगा कि इस मामले में जिला कलेक्टर और उच्च अधिकारी आरोपी नायब तहसीलदार पर क्या कड़ा एक्शन लेते हैं.

‘मैं शराब नहीं पीता, आरोप निराधार’

वहीं अपने ऊपर लगे आरोपों पर नायब तहसीलदार रामदास गोरले ने कहा, ‘मैं यहां पर दंडाधिकारी हूं. निजी वाहन में आकर में किसी भी ट्रैक्टर की जांच कर सकता हूं. संबंधित के द्वारा उसके ट्रैक्टर को थाने में खड़ा करने के बाद कलेक्टर साहब का आदेश बाद दिखाया गया. मेरे द्वारा कोई पैसे की मांग नहीं नहीं की गई. लगाए जा रहे आरोप निराधार है मै शराब भी नहीं पीता हूं.’

वहीं लाड़कुई चौकी प्रभारी राजेश यादव का कहना है, ‘हमारे यहां ट्रैक्टर खड़े करने की कोई जगह ही नहीं है, और हमारे यहां कोई ट्रैक्टर खड़ा नहीं हुआ है. आप जो बता रहे हैं, मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला ही नहीं है, यहां आए दिन रेत वाले और तहसीलदार और नायब तहसीलदार के बीच विवाद होते रहते हैं, यह उनका निजी मामला है, हमारा काम सिर्फ सुरक्षा प्रदान करना है.’

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