विदिशा के शिक्षक ने कर दिया गजब का कारनामा, एक ही पेड़ पर उगा दिए 35 तरह के आम!
एक ही पेड़ पर उगा दिए 35 तरह के आम
कहते हैं कि अगर जुनून हो तो इंसान असंभव को भी संभव बना सकता है. विदिशा जिले की नटेरन तहसील के पामरिया गांव के एक सरकारी शिक्षक ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने किसानों और कृषि विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है. शिक्षक बालकृष्ण विश्वकर्मा ने ग्राफ्टिंग तकनीक की मदद से एक ही आम के पेड़ पर 35 अलग-अलग किस्मों के आम उगाकर कृषि क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है. उनके बगीचे में देशी ही नहीं, बल्कि जापान और अन्य देशों की दुर्लभ आम की प्रजातियां भी फल दे रही हैं.
बालकृष्ण विश्वकर्मा का खेती के प्रति लगाव
सरकारी शिक्षक बालकृष्ण विश्वकर्मा का खेती के प्रति लगाव वर्षों पुराना है. वर्ष 2016 में नीमच और मंदसौर में प्राकृतिक खेती के सफल प्रयोग देखने के बाद उन्होंने भी रासायनिक खेती को अलविदा कह दिया. प्रशिक्षण लेकर उन्होंने जैविक और प्राकृतिक खेती को अपनाया और आज उनका खेत कृषि नवाचार का जीवंत उदाहरण बन चुका है. यहां 125 से अधिक देशी-विदेशी आम की किस्में, औषधीय पौधे और कई नगदी फसलें लहलहा रही हैं.
बगीचे की सबसे बड़ी खासियत
बालकृष्ण के बगीचे की सबसे बड़ी खासियत है एक ऐसा आम का पेड़, जिस पर 35 अलग-अलग किस्मों के आम लगते हैं. इस पेड़ पर जापान का चर्चित मियाजाकी आम, बनाना मैंगो, चिली मैंगो, ब्रुनेई किंग, रेड आइवरी जैसी विदेशी किस्मों के साथ दशहरी, लंगड़ा, चौसा और अल्फांसो जैसी लोकप्रिय भारतीय प्रजातियां भी मौजूद हैं. ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार यह अनोखा पेड़ देखने के लिए दूर-दूर से किसान और कृषि विशेषज्ञ पहुंच रहे हैं.
बालकृष्ण विश्वकर्मा ने कहा
बालकृष्ण विश्वकर्मा ने कहा “मैंने 2016 से रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग बंद कर दिया. ग्राफ्टिंग तकनीक सीखकर एक ही पेड़ पर कई किस्मों के आम लगाने का प्रयोग किया. मेरा उद्देश्य था कि कम जगह में अधिक वैरायटी उपलब्ध हो और किसान इससे प्रेरणा लें. प्राकृतिक खेती से लागत घटती है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बनी रहती है.”