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Gwalior: ‘सरकारी सैलरी लेकर कर रहे माफियागिरी…’, अवैध खनन पर हाई कोर्ट ने लगाई अधिकारियों की क्लास, 16 खदानों पर रोक

MP Gwalior High Court (File Photo)

MP ग्वालियर हाई कोर्ट(File Photo)

MP News: ग्वालियर के बिलौआ-रफादपुर क्षेत्र में कथित अवैध खनन और करोड़ों रुपये की रॉयल्टी एवं पेनल्टी से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गुरुवार को कड़ा रुख अपनाया. जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने 16 खदानों में तत्काल प्रभाव से खनन गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश दिया.

साथ ही अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी जनता के कर से वेतन प्राप्त करते हैं, लेकिन उनकी कार्यशैली माफिया के हितों को बढ़ावा देती नजर आ रही है.

भ्रामक रिपोर्ट पर एसडीएम के खिलाफ अवमानना की तैयारी

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि डबरा के एसडीएम रुपेश रतन सिंघई ने बिना मौके की जांच किए न्यायालय में रिपोर्ट पेश की, जिसे कोर्ट ने भ्रामक माना. इस पर नाराजगी जताते हुए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए. वहीं ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान को जिले में अवैध खनन पर प्रभावी रोक सुनिश्चित करने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी सौंपी गई.

रॉयल्टी-पेनल्टी मामले में देरी पर कोर्ट नाराज

मामले की सुनवाई में यह तथ्य भी सामने आया कि वर्ष 2017 में जारी करोड़ों रुपये की रॉयल्टी और पेनल्टी संबंधी नोटिस पर अब तक अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. इस देरी पर अदालत ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्हें “कुंभकर्णी नींद” में बताया और पूछा कि इतने लंबे समय तक कार्रवाई लंबित क्यों रही.

सीसीटीवी निगरानी पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान कलेक्टर ने कोर्ट को बताया कि सभी ई-चेक पोस्ट पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. हालांकि जब अदालत ने फुटेज की नियमित निगरानी के बारे में जानकारी मांगी तो संबंधित माइनिंग अधिकारी ने स्वीकार किया कि इसकी लगातार मॉनिटरिंग नहीं की जाती.

डीवीआर और फुटेज पेश करने के निर्देश

इसके बाद हाईकोर्ट ने सभी ई-चेक पोस्ट के डीवीआर और सीसीटीवी फुटेज जब्त कर 17 जुलाई को सीलबंद लिफाफे में पेश करने के निर्देश दिए. अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी स्थान की फुटेज गायब या छेड़छाड़ की हुई मिली तो इसे सबूत नष्ट करने की कोशिश माना जाएगा.

लीज नवीनीकरण पर भी मांगा जवाब

अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि नो-ड्यूज प्रमाणपत्र के बिना कई खदानों की लीज का नवीनीकरण किस आधार पर किया गया. अब मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी, जिसमें प्रशासन को अब तक की कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी.

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