मऊगंज में सिस्टम की सुनियोजित चुप्पी, माफिया के आगे बेबस खनिज विभाग!
अवैध खनन
रिपोर्ट- लवकेश सिंह
MP News: मऊगंज जिले के हर्रहा में जिस खदान की जांच करने अधिकारी मौके पर पहुंचे, उन्हें यही नहीं पता कि जमीन किसकी है और जांच आखिर किसके खिलाफ करनी है. मऊगंज जिले के हर्रहा गांव में अवैध खनन ने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है.
एक ओर पीड़ित महिला न्यायालय के चक्कर काट रही है, तो दूसरी ओर खनिज विभाग के अधिकारी जांच के नाम पर खानापूर्ति करते दिखाई रहे हैं.
30 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक पहुंचा खनन
छह महीने पहले जिस खदान में महज 30 प्रतिशत खनन हुआ था, वहीं खनन आज अधिकारियों की कथित निगरानी में 80 प्रतिशत तक पहुंच चुका है.
हर्रहा: माफिया के लिए सोना, जनता के लिए कब्र
हर्रहा गांव की जमीन अब आम लोगों के लिए खतरा बन चुकी है. शिकायतकर्ता के अनुसार खसरा नंबर 8/13 में बिना किसी लीज या अनुमति के 50 फीट से अधिक गहरी “मौत की खाइयां खोद दी गई है. पीड़िता ललिता मौर्या का आरोप है कि पति की मौत के बाद उनकी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया. भू-माफिया उपेंद्र सिंह पर बिना किराया दिए करीब डेढ़ एकड़ जमीन को छलनी करने का गंभीर आरोप है.
पहले अवैध खनन, अब वैधता का नाटक
चौंकाने वाली बात यह है कि जिस जमीन पर वर्षों से अवैध खनन चल रहा है, अब उसी जमीन पर खदान स्वीकृत कराने के लिए आवेदन दे दिया गया है. यानी पहले चोरी, फिर सीनाजोरी! अवैध ब्लास्टिंग से गांव के घरों और सरकारी स्कूलों में दरारें आ चुकी हैं. आदिवासी समाज पलायन को मजबूर है.
जांच के नाम पर प्रशासनिक तमाशा
जब मामला न्यायालय पहुंचा और मीडिया ने बार-बार खबरें प्रकाशित कीं, तब जाकर राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। लेकिन जांच का नज़ारा हैरान करने वाला रहा. हाथ में शिकायत की फाइल, साथ में पटवारी—फिर भी प्रभारी खनिज अधिकारी सुनित राजपूत ऑन-कैमरा कहते हैं हमें नहीं पता जमीन किसकी है और हम किसकी जांच करने आए हैं.
खानापूर्ति की जांच, बढ़ता नुकसान
महीनों पहले ग्रामीणों की शिकायतों पर जो जांच हुई, वह महज खानापूर्ति साबित हुई. नतीजा यह कि आज 80 प्रतिशत जमीन माफिया निगल चुका है. सवाल यह भी है कि क्या मशीनें केवल दिखावे के लिए जब्त की जाती हैं और फिर उन्हीं के हवाले कर दी जाती हैं? हर्रहा में जो कुछ हो रहा है, वह सिर्फ अवैध उत्खनन नहीं, बल्कि खुलेआम कानून और प्रशासन का मखौल है.
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