BRICS Agriculture Conference: एमपी के ग्रामीण हाट से प्रभावित हुए BRICS देशों के कृषि विशेषज्ञ, कृषि उत्पादों की जमकर सराहना

Indore BRICS Agriculture Conference: ग्रामीण हाट पहुंचने पर अतिथियों का मालवा की पारंपरिक संस्कृति के अनुरूप पगड़ी पहनाकर और जनजातीय लोक नृत्य के साथ स्वागत किया गया. स्वागत कार्यक्रम के दौरान कई विदेशी प्रतिनिधि लोक कलाकारों के साथ ढोल-मंजीरे की धुन पर थिरकते नजर आए.
BRICS Agriculture Conference

ग्रामीण हाट से प्रभावित हुए BRICS देशों के कृषि विशेषज्ञ

Indore BRICS Agriculture Conference: इंदौर में 9 से 13 जून तक आयोजित ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के दौरान मंगलवार को विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने ग्रामीण हाट का भ्रमण कर मध्यप्रदेश की कृषि विरासत, ओडीओपी उत्पादों और ग्रामीण उद्यमिता के सफल मॉडलों को करीब से देखा. मेरा युवा भारत और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भ्रमण ने विदेशी मेहमानों को प्रदेश की कृषि विविधता और मूल्य संवर्धन की संभावनाओं से परिचित कराया.

लोक कलाकारों संग झूमे विदेशी मेहमान

ग्रामीण हाट पहुंचने पर अतिथियों का मालवा की पारंपरिक संस्कृति के अनुरूप पगड़ी पहनाकर और जनजातीय लोक नृत्य के साथ स्वागत किया गया. स्वागत कार्यक्रम के दौरान कई विदेशी प्रतिनिधि लोक कलाकारों के साथ ढोल-मंजीरे की धुन पर थिरकते नजर आए. इस सांस्कृतिक माहौल ने मेहमानों को विशेष रूप से आकर्षित किया.

सुंदरजा आम और चिन्नौर चावल बने आकर्षण का केंद्र

हाट में प्रदर्शित कृषि उत्पादों में बुरहानपुर के केले से बने चिप्स, कुकीज़ और केले के रेशों से तैयार वस्त्र आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे. प्रतिनिधियों ने इन नवाचारों की सराहना करते हुए कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन की संभावनाओं पर चर्चा की. इसके अलावा रीवा के जीआई टैग प्राप्त सुंदरजा आम और बालाघाट के प्रसिद्ध चिन्नौर चावल का स्वाद लेकर उन्होंने प्रदेश की विशिष्ट कृषि पहचान की प्रशंसा की.

दुर्लभ श्रीअन्न और जैव विविधता ने खींचा ध्यान

ब्रिक्स देशों के कृषि विशेषज्ञों ने झाबुआ की साठी मक्का और दूध मोगर मक्का के साथ मंडला की ‘मिलेट क्वीन’ लहरी बाई द्वारा संरक्षित दुर्लभ श्रीअन्न किस्मों में विशेष रुचि दिखाई. नीमच की औषधीय फसलें, नरसिंहपुर का करेली गुड़ तथा छिंदवाड़ा के वन उत्पाद भी चर्चा का विषय बने. विशेषज्ञों ने इन उत्पादों को जैव विविधता संरक्षण और टिकाऊ कृषि के उत्कृष्ट उदाहरण बताया.

चंदेरी-महेश्वरी और गोंड कला ने जीता मन

वस्त्र एवं हस्तशिल्प खंड में मृगनयनी द्वारा प्रदर्शित चंदेरी, महेश्वरी और कोसा वस्त्रों के साथ बाघ प्रिंट तथा गोंड कला को भी खूब सराहा गया. प्रकृत सिल्क के तसर और मलबरी सिल्क उत्पादों के अलावा कम पानी में तैयार होने वाले हेम्प क्लोदिंग ने भी प्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया.

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ग्रामीण हाट मॉडल से प्रभावित हुए विदेशी मेहमान

भ्रमण के दौरान विदेशी मेहमानों ने महिला स्व-सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद कर उनके कार्यों की जानकारी ली. उन्होंने कृषि आधारित उद्यमिता और मूल्य संवर्धन के इन मॉडलों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. प्रतिनिधियों ने ग्रामीण हाट को मध्यप्रदेश की कृषि समृद्धि और सतत विकास का उत्कृष्ट मंच बताते हुए ऐसे मॉडलों को अपने देशों में अपनाने की इच्छा भी व्यक्त की.

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