Indore Water Crisis: मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में इस वर्ष सामान्य से कम बारिश होने के कारण आने वाले महीनों में जलसंकट गहराने की आशंका है. शहर में पेयजल आपूर्ति बनाए रखने के लिए नगर निगम ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं. इसके तहत नवंबर से अप्रैल के बीच यशवंत सागर और बिलावली तालाब को नर्मदा के पानी से दो बार भरने की योजना बनाई गई है. इसके अलावा शहर में नए बोरिंग पर प्रतिबंध लगाने और पानी के टैंकरों की संख्या बढ़ाने की तैयारी भी की जा रही है.
सामान्य से 14 इंच कम बारिश
इंदौर में इस मानसून सीजन में महज 23 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 14 इंच कम है. कम बारिश का असर शहर के प्रमुख जलस्रोतों पर भी दिखाई देने लगा है. यशवंत सागर और बिलावली तालाब अपनी पूरी क्षमता तक नहीं भर पाए हैं.
यशवंत सागर से शहर के छह पानी की टंकियों में जलापूर्ति की जाती है. इसकी क्षमता 19 फीट है, लेकिन इस बार तालाब पूरी तरह नहीं भर सका. ऐसे में दिसंबर-जनवरी से ही शहर में पानी की किल्लत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
नर्मदा से दो बार भरेंगे दोनों तालाब
जलसंकट से निपटने के लिए नगर निगम ने यशवंत सागर और बिलावली तालाब को नर्मदा नदी के पानी से दो बार भरने की योजना तैयार की है. इसके लिए नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण से चर्चा की गई है और सैद्धांतिक सहमति भी मिल चुकी है.निगम का प्रयास है कि नवंबर से अप्रैल के बीच दोनों तालाबों में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाए, ताकि गर्मियों में शहर की जलापूर्ति प्रभावित न हो.
नए बोरिंग पर रोक लगाने की तैयारी
शहर में लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए नगर निगम नए बोरिंग पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए जिला प्रशासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा.निगम के अनुसार, शहर में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों के दौरान भी बोरिंग किए जा रहे हैं. इससे भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है. प्रस्ताव के तहत नए बोरिंग पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की जाएगी.
800 से अधिक टैंकर चलाने की योजना
जलसंकट की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने के लिए नगर निगम टैंकरों की संख्या बढ़ाएगा. पिछले वर्ष शहर में 700 से अधिक टैंकर चलाए गए थे, जबकि इस बार 800 से ज्यादा टैंकर चलाने की तैयारी है.विशेष रूप से पाइपलाइन विस्तार से वंचित और पानी की किल्लत वाले क्षेत्रों में टैंकरों की संख्या बढ़ाई जाएगी.
लीकेज रोकने और पानी की बर्बादी पर जोर
नगर निगम जलापूर्ति व्यवस्था की साप्ताहिक समीक्षा भी करेगा. पाइपलाइनों में लीकेज को प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जाएगा, ताकि पानी की बर्बादी रोकी जा सके.इसके अलावा निर्माण कार्यों और अन्य गैर-पेयजल उपयोग के लिए ट्रीटेड वाटर के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा.नगर निगम की इन तैयारियों का उद्देश्य गर्मियों से पहले जलसंकट की स्थिति को नियंत्रित करना और शहरवासियों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है.
