Vistaar NEWS

Indore: ‘छात्रों की गूंज’ में राहुल गांधी के 5 दावों पर उठे सवाल, सोशल मीडिया पर हुआ फैक्ट चेक!

Rahul Gandhi

राहुल गांधी

Chhatron Ki Goonj: इंदौर में आज 19 सितंबर को राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के पहले और देश के पांचवें ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने प्रदेश के अलग-अलग जिलों से इंदौर पहुंचे छात्रों और युवाओं से बात की. उन्होंने अपने कार्यक्रम में सरकार पर सवाल उठाते हुए कुछ आंकड़े भी पेश किए. लेकिन राहुल गांधी के इन दावों पर ‘झूठ की गूंज’ नाम के एक एक्स पेज ने तीखा फैक्ट-चेक किया.

सोशल मीडिया पर इस फैक्ट चेक के स्क्रीनशॉट्स जमकर वायरल हो रहे हैं. दरअसल कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी हजारों छात्रों के बीच सरकार के खिलाफ बड़े-बड़े दावे कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक्टिव ‘झूठ की गूंज’ नामक एक पेज पर राहुल गांधी के भाषण में किए गए दावों की एक-एक कर धज्जियां उड़ाई जा रही थीं.

पहला दावा
राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) पर आरोप लगाया कि पिछले 8 सालों में 13% पदों को होल्ड पर रखा गया है, जिससे 4.87 लाख पद पेंडिंग पड़े हैं.
फैक्ट चेक- ‘झूठ की गूंज’ एक्स पेज ने इसे पूरी तरह से गलत बताया. इस फैक्ट चेक में कहा गया कि मध्य प्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग का 87:13 का फॉर्मूला पिछले आठ साल से नहीं, बल्कि 29 सितंबर 2022 यानी महज चार साल पहले आया था. यह विवाद कांग्रेस के कार्यकाल में 2019 में 27% ओबीसी आरक्षण बढ़ाने से शुरू हुआ था. नियुक्तियां 87% पदों पर जारी रहीं और केवल लगभग 10,000 पद ही इस कानूनी पेच से प्रभावित हुए हैं, न कि 4.87 लाख पद.

दूसरा दावा
राहुल गांधी ने दावा किया कि मार्च 2019 में कांग्रेस सरकार ने ओबीसी 14% से बढ़ाकर 27% किया था, लेकिन बीजेपी सरकार ने कोर्ट का हवाला देकर इसे रोक दिया.
फैक्ट चेक- इस दावे का फैक्ट चेक करते हुए ‘झूठ की गूंज’ एक्स पेज ने पोस्ट किया कि रिकॉर्ड्स के मुताबिक, कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 8 मार्च 2019 को अध्यादेश के जरिए OBC आरक्षण बढ़ाया था. हालांकि, इस फैसले को बीजेपी सरकार ने नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने संवैधानिक सीमा (50% आरक्षण की सीमा पार होने के कारण) पर अंतरिम रोक लगाई थी. यह मामला अदालत में विचाराधीन है, न कि सरकार ने इसे स्वेच्छा से रोका है.

तीसरा दावा
अडानी समूह को मिलने वाले सरकारी ठेकों और पैसों को सीधे तौर पर केंद्र सरकार के साथ जोड़ा जाता है.
फैक्ट चेक- इस दावे का फैक्ट चेक करते हुए ‘झूठ की गूंज’ एक्स पेज ने पोस्ट किया कि अगर अडानी की हर डील में सरकार की मिलीभगत है, तो कांग्रेस शासित राज्य क्यों उनके साथ बिजनेस कर रहे हैं?

चौथा दावा
राहुल गांधी के इस कार्यक्रम में मंच पर असली छात्रों को लाकर उनकी समस्याएं दिखाई गईं.
फैक्ट चेक- कार्यक्रम के बाद जब सोशल मीडिया पर छानबीन हुई, तो सामने आया कि मंच पर छात्रों की आवाज बनकर बात करने वाले कुछ चेहरे (जैसे तनय शर्मा) माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी के छात्र होने के साथ-साथ NSUI (कांग्रेस के छात्र संगठन) के पूर्व पदाधिकारी/प्रवक्ता रह चुके हैं.

पांचवां दावा
राहुल गांधी के इस कार्यक्रम में दावा किया गया कि सरकार आदिवासियों को शिक्षा से दूर रखना चाहती है.
फैक्ट चेक- ‘झूठ की गूंज’ पेज की तरफ से कहा गया कि देश में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों (EMRS) की संख्या 2014-15 में 129 थी, जो बढ़कर अगस्त 2026 तक 511 हो गई है. इन स्कूलों में छात्रों की संख्या 40,000 से बढ़कर लगभग 1.5 लाख तक पहुंच चुकी है. इसके अलावा, प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से लाखों आदिवासी छात्र लाभान्वित हो रहे हैं.

ये भी पढ़ें: LIVE: सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स में राहुल गांधी से युवा बोले- हम सिस्टम से हार गए

Exit mobile version