Sagar Sharab Kand: सागर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले को लेकर आज हाई कोर्ट में एक बार फिर सुनवाई हुई. राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में जवाब पेश किया गया, जिसमें कहा गया कि सागर में जहरीली शराब पीने से 20 लोगों की मौत हुई है. सरकार ने बताया कि मृतकों के परिवार वालों को 4-4 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया है. इसके साथ ही 7 बिंदुओं पर सरकार ने अपना जवाब कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया. सरकार की ओर से दलील दी गई कि शराब कांड की न्यायिक जांच के लिए आयोग का गठन किया गया है.
न्यायिक जांच के लिए आयोग का गठन
सरकार ने कोर्ट को बताया कि जस्टिस वीपीएस चौहान की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया है. यह आयोग सागर जहरीली शराब कांड से जुड़े पूरे मामले की जांच करेगा. सरकार की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि मामले में दर्ज 3 एफआईआर में अब तक 52 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
याचिकाकर्ता ने मौतों के आंकड़े पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता एडवोकेट वैभव सिंह ने कोर्ट को बताया कि सागर जहरीली शराब कांड में पुलिस और प्रशासन की ओर से 20 लोगों की मौत होने की बात कही जा रही है, जबकि मीडिया रिपोर्ट्स में 30 से 40 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आ रही है. याचिकाकर्ता ने कहा कि मौतों की वास्तविक संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए.
याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने मुआवजे को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई है. ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह मुआवजा किस आधार पर दिया गया है और इसके लिए क्या मापदंड तय किए गए हैं.
सरकार के जांच आयोग के सामने रखें अपनी बात
एडवोकेट वैभव सिंह ने सागर जहरीली शराब कांड के लिए सागर एसपी और कलेक्टर को भी जिम्मेदार ठहराया. याचिकाकर्ता की ओर से मामले में प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग की गई.
उन्होंने जहरीली शराब कांड की निष्पक्ष और व्यापक जांच की आवश्यकता कोर्ट के सामने रखी. वैभव सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से जो जांच आयोग गठित किया गया है, याचिकाकर्ता उसके समक्ष अपनी बातें रख सकते हैं.
कोर्ट ने इसी आधार पर याचिका का निराकरण कर दिया. हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह राहत भी दी है कि यदि जांच आयोग के समक्ष उनकी बातों पर सुनवाई नहीं होती है, तो वह दोबारा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं. याचिकाकर्ता एडवोकेट वैभव सिंह ने कहा कि यदि जांच आयोग के समक्ष उनकी बातों पर सुनवाई नहीं होती है, तो वह इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे.
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