Jabalpur News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक कंपनी को टेंडर प्रक्रिया में राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने पाया कि कंपनी की तकनीकी बोली पहले ही खारिज हो चुकी थी और इस अस्वीकृति को चुनौती देने के लिए याचिका में जरूरी संशोधन नहीं किया गया था.
हालांकि, आबकारी आयुक्त द्वारा 18 जून 2026 को लाइसेंस नवीनीकरण के आवेदन खारिज करने के आदेश की वैधता का मामला अभी खुला है. युगलपीठ ने इस हिस्से को सुनवाई के लिए एकलपीठ के पास भेज दिया है.
टेंडर प्रक्रिया में राहत की मांग
कंपनी ने आबकारी विभाग की ओर से जारी टेंडर की शर्तों को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. साथ ही 18 जून को आबकारी आयुक्त द्वारा उसके विभिन्न शराब लाइसेंस के नवीनीकरण आवेदन खारिज किए जाने के आदेश को भी चुनौती दी गई थी.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि कंपनी की तकनीकी बोली पहले ही निरस्त हो चुकी थी. इसके बावजूद कंपनी ने उस अस्वीकृति को चुनौती देने के लिए याचिका में आवश्यक संशोधन नहीं किया.
कर्मचारियों की सजा का दिया हवाला
कंपनी ने दलील दी कि उसके लाइसेंस कुछ कर्मचारियों के आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के आधार पर निलंबित किए गए थे. कंपनी के मुताबिक संबंधित व्यक्ति उसके कर्मचारी नहीं थे और कंपनी या उसके निदेशक भी उस मामले में आरोपी नहीं थे. इससे पहले हाई कोर्ट की युगलपीठ ने कंपनी को नए सिरे से लाइसेंस के लिए आवेदन करने की अनुमति दी थी.
चार सदस्यीय समिति ने की जांच
इसके बाद कंपनी ने लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आवेदन किया. आबकारी विभाग ने चार सदस्यीय समिति गठित कर अतिरिक्त दस्तावेज और जानकारी मांगी. जांच में सरकारी बकाया, कथित गलत घोषणाओं, लंबित मामलों और वैधानिक अनुपालन से जुड़े मुद्दे सामने आए. कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसका जवाब उसने 17 जून को दिया.
175 पन्नों का आदेश जारी
कंपनी के जवाब के अगले दिन 18 जून को आबकारी आयुक्त ने करीब 175 पन्नों का आदेश जारी कर लाइसेंस नवीनीकरण आवेदन खारिज कर दिया. कंपनी ने आरोप लगाया कि उसके जवाब पर पर्याप्त विचार किए बिना जल्दबाजी में आदेश पारित किया गया. शासन ने कहा कि आबकारी लाइसेंस का नवीनीकरण वैधानिक अधिकार नहीं है और विभाग को आवेदक के आचरण, आपराधिक पृष्ठभूमि, सरकारी देनदारी और नियमों के पालन की जांच का अधिकार है.
लाइसेंस विवाद पर अब एकलपीठ करेगी सुनवाई
युगलपीठ ने टेंडर में राहत देने का आधार नहीं माना, क्योंकि कंपनी की तकनीकी बोली पहले ही खारिज हो चुकी थी. वहीं, लाइसेंस नवीनीकरण का आदेश वैध है या नहीं, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. इस मुद्दे को एकलपीठ के समक्ष भेजा गया है. ऐसे में टेंडर में भागीदारी को लेकर कंपनी को फिलहाल राहत नहीं मिली है, जबकि लाइसेंस नवीनीकरण से जुड़ी कानूनी लड़ाई आगे जारी रहेगी.
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