‘मैं सीता माता नहीं, कितनी परीक्षाएं दूं…,’ महाकुंभ की वायरल साध्वी हर्षा रिछारिया का धर्म से छूटा मोह, किया बड़ा ऐलान
हर्षा रिछारिया
Harsha Richhariya: एंकर- एक्टर और मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने सनातन धर्म और धार्मिक संस्थाओं को लेकर बड़ा बयान दिया है. हर्षा ने कहा कि लगातार संतों और धर्म गुरुओं द्वारा तिरस्कार किए जाने से वे मानसिक रूप से आहत हैं और इसी कारण उन्होंने फिर से ग्लैमर की दुनिया में लौटने का फैसला किया है.
हर्षा रिछारिया ने यह बात जबलपुर में एक निजी कार्यक्रम के दौरान कही. उन्होंने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले में गंगा स्नान के बाद वे सार्वजनिक रूप से ‘हर-हर महादेव’ कहकर अपने इस फैसले की घोषणा करेंगी. लगातार एक साल से मुझे परीक्षाओं से गुजरना पड़ा है. मैं सीता माता नहीं हूं कि इतनी परीक्षाएं दूं.
समाज की सोच पर उठाए सवाल
हर्षा ने कहा कि अपनेपन की उम्मीद लेकर मैं धर्म के रास्ते पर चली थी, लेकिन लगातार मेरा तिरस्कार किया गया. इसके साथ ही हर्षा ने समाज की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह देश पुरुष प्रधान सोच से ग्रसित है, जहां नारी को आगे बढ़ने से रोका जाता है. पिछले 1 साल से जिन लोगों की वजह से वो प्रताड़ित हैं जो लोग उन्हें लगातार ट्रोल कर रहे हैं उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर बयान बाजी करते हैं या उनके गलत तरह की वीडियो गलत भाषा में प्रसारित करते हैं ऐसे लोगों ने अब अगर दोबारा ऐसी हरकत की तो वह ऐसे लोगों को कोर्ट में घसीटेंगे.
दूसरे धर्म के लोग भी संपर्क साध रहें
- हर्षा ने बताया कि जब से उन्होंने धर्म प्रचार की राह छोड़ने की बात कही है तब से उन्हें दूसरे धर्म के लोग भी लगातार संपर्क करने की कोशिश कर रहे .हैं उन्हें ईसाई और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी संपर्क किया है लेकिन उन्होंने ऐसे तमाम लोगों को साफ संदेश दे दिया कि वह केवल धर्म प्रचार की राह छोड़ रही है. धर्म नहीं छोड़ रही है. वह हिंदू थी, हिंदू हैं और हमेशा हिंदू ही रहेंगी.
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किसी ने नहीं दिया साथ: हर्षा रिछारिया
- बता दें, हर्ष रिछारिया ने कहा कि पिछले 1 साल से उन्होंने कई बड़े धर्म गुरुओं साधु संतों से संपर्क किया उनको लेकर जो विवाद खड़े किए जा रहे थे. इन समस्याओं को लेकर उन्होंने तमाम धर्म गुरुओं से बातचीत की लेकिन किसी ने भी उनके साथ नहीं दिया. जो लोग शुरुआत में उनके साथ खड़े थे. बाद में वह भी बदल गए.
- यहां तक की जो महिलाएं धर्मगुरु बनकर बैठी हैं. उन्होंने भी उनका साथ नहीं दिया. हर्षा ने कहा कि यह बात बिल्कुल समझ से परे है कि आखिरकार एक लड़की धर्म प्रचार की राह में अगर चलना चाहती है. तो उसका सहयोग करने की बजाय उसके खिलाफ लोग क्यों खड़े हो रहे हैं. हर्षा ने आध्यात्मिक क्षेत्र में नेपोटिज्म की भी बात कही है.