MP News: त्रिकोणीय हुआ सतना लोकसभा सीट मुकाबला, क्या है सियासी समीकरण, जानिए A TO Z

Satna Lok Sabha seat: सतना लोकसभा सीट एमपी के विंध्य क्षेत्र में आती है. यूपी की सीमा से लगी इस सीट पर बीएसपी का प्रभाव भी देखने को मिलता है.

satna lok sabha seat

सतना लोकसभा सीट में त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है.

भोपाल: बीएसपी ने लोकसभा चुनावों के लिए एमपी के सात उम्मीदवारों की घोषणा कर दी. इन सात उम्मीदवारों में चौंकाने वाला नाम है नारायण त्रिपाठी मैहर से चार बार के विधायक रहे. त्रिपाठी को बीएसपी ने सतना से उम्मीदवार बनाया है. सतना लोकसभा सीट से नारायण त्रिपाठी के उम्मीदवार बनते ही यहां त्रिकोणीय मुकाबले की पूरे आसार है. 21 मार्च को सुबह नारायण त्रिपाठी ने बीएसपी ज्वॉइन की और शाम को बीएसपी ने सात उम्मीदवारों की सूची में त्रिपाठी को जगह दे दी.

सतना लोकसभा सीट एमपी के विंध्य क्षेत्र में आती है. यूपी की सीमा से लगी इस सीट पर बीएसपी का प्रभाव भी देखने को मिलता है. इस सीट से वर्तमान सांसद गणेश सिंह बीजेपी से हैं वहीं कांग्रेस ने यहां से सिद्धार्थ कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है जो सतना विधानसभा सीट से विधायक हैं. सतना सीट पर चुनाव दूसरे चरण में 26 अप्रैल को होना हैं. इस सीट पर होने वाले त्रिकोणीय मुकाबले को समझते हैं-

गणेश सिंह – सतना से चार बार के सांसद हैं

संपत्ति – नौ करोड़ रुपये+
आपराधिक मामले – दो

बीजेपी नेता और वर्तमान सांसद गणेश सिंह हैं. सतना से चार बार यानी साल 2004, 2009, 2014 और 2019 में चुनाव जीतकर सांसद बने. कुर्मी समाज से आने वाले गणेश सिंह को स्थानीय जाति और बीजेपी के सदाबहार वोट का फायदा मिलता है. सतना लोकसभा सीट पर पटेल-कुशवाहा वोट अधिक है और बीजेपी के ब्राह्मण-क्षत्रिय वोट मिलकर गणेश सिंह को जीतने मदद की है.

बीजेपी ने एमपी विधानसभा चुनाव में छह सांसदों को विधायकी का चुनाव लड़वाया था. इनमें से दो सांसद हार गए इन दो में से एक गणेश सिंह हैं. सतना सीट से विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाहा ने हराया था. विधानसभा में हार के बावजूद गणेश सिंह को बीजेपी ने गणेश सिंह को उम्मीदवार बनाया है.

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में गणेश सिंह ने करीबी उम्मीदवार यानी कांग्रेस के राजाराम त्रिपाठी पर दो लाख 31 हजार से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की थी. जहां गणेश सिंह को 5 लाख 88 हजार वोट मिले वहीं राजाराम त्रिपाठी को 3 लाख 57 हजार मत मिले. साल 2004 से 2019 की बात करें तो सबसे कम जीत का अंतर 2009 में रहा. करीबी प्रतिद्वंदी यानी बीएसपी के सुखलाल कुशवाहा को मात्र चार हजार वोट से हराया था.

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नारायण त्रिपाठी – मैहर से चार बार के विधायक

संपत्ति – 86 लाख+
आपराधिक मामले – शून्य (0)

नारायण त्रिपाठी का नाम 2024 के लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार के रूप में सामने आने पर मामला रोमांचक हो गया है. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी से विधायक बनने के बाद अब नारायण त्रिपाठी अब बहुजन समाज पार्टी से लोकसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं. ब्राह्मण समाज से आने वाले नारायण त्रिपाठी मैहर की सीट से चार बार विधायक रहे. साल 2003 में समाजवादी पार्टी से विधायक बने, साल 2013 में कांग्रेस की टिकट पर लड़े और जीते. साल 2016 में नारायण त्रिपाठी कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हो गए. इसी साल उपचुनाव हुए और नारायण त्रिपाठी उपचुनाव जीत गए.

साल 2018 में बीजेपी के टिकट से चुनाव लड़े और जीत गए. इस चुनाव में कांग्रेस के प्रतिद्वंदी को लगभग साढ़े तीन हजार वोट से हराया था. इस जीत के बावजूद बीजेपी ने उन्हें साल 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया. इस कारण उन्होंने बीजेपी से इस्तीफा देकर विंध्य जनता पार्टी बनाई. विंध्य जनता पार्टी ने विंध्य की सीट पर उम्मीदवार उतारे. नारायण त्रिपाठी ने खुद मैहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा लेकिन चौथे नंबर पर आए.

विस्तार न्यूज़ से बात करते हुए नारायण त्रिपाठी ने कहा कि, मैं विंध्य के विकास के लिए काम करता रहूंगा. नारायण त्रिपाठी सतना से वर्तमान सांसद गणेश सिंह पर निशाना साधते हुए कहते है कि उन्होंने सतना के लिए कुछ नहीं किया.

सिद्धार्थ कुशवाहा – सतना से दो बार के विधायक

संपत्ति – एक करोड़ रुपये+
आपराधिक मामले – दो

सिद्धार्थ कुशवाहा सतना लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार बनाए गए हैं. सतना विधानसभा सीट से दो बार के विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा इस बार लोकसभा चुनाव में ताल ठोकते हुए नजर आएंगे. पहली बार सतना सीट से 2018 में विधायक बने थे. साल 2023 में सिद्धार्थ कुशवाहा ने विधानसभा चुनाव में वर्तमान सांसद गणेश सिंह को 16 हजार से ज्यादा वोट से हराया था. सतना लोकसभा सीट से सिद्धार्थ के पिता सुखलाल कुशवाहा सांसद रह चुके हैं. वहीं साल 2009 में गणेश सिंह ने सुखलाल कुशवाहा को हराया था. सिद्धार्थ ओबीसी वर्ग से आते हैं. सतना लोकसभा सीट पर पटेल-कुशवाहा वोटरों की संख्या अच्छी खासी है जो निर्णायक बनती है.

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