Mauganj News: मऊगंज जिले में लगातार हो रही बारिश ने नईगढ़ी नगर की तस्वीर बदल दी है. कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. इसी बीच अष्टभुजा नदी के पास सामने आई एक घटना ने प्रशासनिक आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बताया जा रहा है कि एक मजदूर तेज बहाव में फंस गया और करीब दो घंटे तक एक पत्थर का सहारा लेकर जिंदगी और मौत से जूझता रहा. वह लगातार मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन समय रहते उसे सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जा सका. बाद में वह तेज बहाव में बह गया.
शीट बचाने के चक्कर में पानी में फंसा
बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य से जुड़ा मजदूर तेज बहाव के बीच अपनी सामग्री और शीट को बचाने की कोशिश कर रहा था. इसी दौरान पानी का बहाव अचानक इतना तेज हुआ कि वह उसकी चपेट में आ गया. किसी तरह उसने एक पत्थर को पकड़कर खुद को रोक लिया. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मजदूर लंबे समय तक पानी के बीच फंसा रहा और लोगों से मदद की गुहार लगाता रहा. मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा थी, लेकिन तेज बहाव के कारण कोई व्यक्ति सीधे उसके पास जाने का जोखिम नहीं उठा सका.
दो घंटे तक चलता रहा जिंदगी और मौत का संघर्ष
घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि मजदूर करीब दो घंटे तक अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करता रहा. आसपास मौजूद लोग मदद की उम्मीद लगाए बैठे रहे. सवाल यह उठ रहा है कि जब व्यक्ति इतने लंबे समय तक आंखों के सामने जीवन के लिए जूझ रहा था, तब प्रशिक्षित आपदा राहत दल और जरूरी बचाव संसाधन कितनी तेजी से सक्रिय हुए. आखिरकार मजदूर पानी के तेज बहाव में बह गया. उसके लापता होने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई.
रेस्क्यू में देरी के आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मऊगंज मुख्यालय से नईगढ़ी की दूरी ज्यादा नहीं है, बावजूद इसके प्रशासनिक और आपदा राहत व्यवस्था की गति सवालों के घेरे में रही. लोगों का कहना है कि मौके पर अधिकारी और पुलिसकर्मी पहुंचे, लेकिन प्रभावी रेस्क्यू कार्रवाई में देरी हुई.
छत पर कैद तीन मजदूर
इसी बाढ़ के बीच निर्माणाधीन भवन की छत पर तीन मजदूरों के फंसे होने की खबर ने भी चिंता बढ़ा दी. बताया गया कि सुबह से दोपहर तक तीनों मजदूर पानी से घिरे भवन की छत पर फंसे रहे. नीचे चारों ओर पानी का तेज बहाव था और बाहर निकलने का रास्ता बंद था. ऐसे हालात में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर निर्माण एजेंसी और ठेकेदार की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठ रहे हैं.
अमृत योजना के निर्माण कार्य पर उठे सवाल
घटना को अमृत योजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य से भी जोड़ा जा रहा है. आरोप है कि निर्माण स्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे. यदि भारी बारिश और बाढ़ की आशंका के बावजूद मजदूरों को असुरक्षित स्थान पर रखा गया था, तो इसकी जांच आवश्यक है. यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि ठेकेदार ने श्रमिकों के लिए सुरक्षित आवास और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था की थी या नहीं.
नईगढ़ी नगर में हर तरफ पानी ही पानी
भारी बारिश के कारण नईगढ़ी नगर के कई वार्ड जलमग्न बताए जा रहे हैं. कई घरों में पानी घुसने के साथ ही तहसील कार्यालय और छात्रावासों तक पानी पहुंचने की स्थिति सामने आई है. सड़कें पानी में डूब गई हैं और तेज बहाव के बीच लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं.
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