मऊगंज में सड़क निर्माण में अनियमितता के आरोप, ग्रामीण बोले- लाखों खर्च करके भी घटिया क्वालिटी की सामग्री का इस्तेमाल
मऊगंज में सड़क निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल करने का आरोप.
MP News: मऊगंज जिले की नईगड़ी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत जिलहड़ी में बन रही पीसीसी सड़क अब विकास से ज्यादा विवादों की वजह बनती जा रही है. ग्रामीणों का आरोप है कि जिस सड़क पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहां निर्माण कार्य में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है. आरोप इतने गंभीर हैं कि ग्रामीण अब इसे केवल लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार का मामला बता रहे हैं.
‘मानकों का पालन नहीं किया गया’
ग्रामीणों के मुताबिक सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत एस्टीमेट में स्पष्ट तकनीकी मानक तय किए गए थे. नियमों के अनुसार पहले 10 सेंटीमीटर मोरम की परत, उसके ऊपर 40 एमएम गिट्टी युक्त कंक्रीट बेस और फिर 20 एमएम गिट्टी व सीमेंट मिश्रित मजबूत कंक्रीट परत डाली जानी थी. लेकिन मौके पर कार्य की स्थिति देखकर ग्रामीणों का आरोप है कि इन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा. यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल निर्माण गुणवत्ता से समझौता होगा बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला माना जाएगा.
सरपंच, सचिव और इंजीनियर पर मिलीभगत के आरोप
गांव में सबसे ज्यादा चर्चा उस कथित तीन की तिकड़ी को लेकर है. जिसमें सरपंच, पंचायत सचिव और संबंधित तकनीकी अधिकारी या इंजीनियर की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग डेढ़ सौ मीटर लंबी सड़क के निर्माण में नियमों को ताक पर रखकर कार्य कराया जा रहा है और जिम्मेदार लोग सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे बैठे हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण स्थल पर उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता और मात्रा दोनों ही संदेह के घेरे में हैं. आरोप है कि यदि तकनीकी परीक्षण कराया जाए तो कई गंभीर खामियां उजागर हो सकती हैं.
जिम्मेदार अधिकारी आखिर खामोश क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गांव में खुलेआम शिकायतें हो रही हैं तो संबंधित विभाग के अधिकारी अब तक मौके पर निरीक्षण करने क्यों नहीं पहुंचे? क्या निर्माण कार्यों की निगरानी केवल फाइलों और कागजों तक सीमित रह गई है? यदि कार्य पूरी तरह मानकों के अनुरूप हो रहा है तो शिकायतों का तत्काल निराकरण क्यों नहीं किया जा रहा?
ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों की चुप्पी संदेह को और मजबूत कर रही है. लोगों का आरोप है कि विभागीय उदासीनता के कारण भ्रष्टाचार करने वालों के हौसले बुलंद हैं और सरकारी योजनाएं कुछ लोगों की कमाई का माध्यम बनती जा रही हैं.
विकास के नाम पर जनता के पैसे की बर्बादी?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया गया तो कुछ ही महीनों में सड़क उखड़ सकती है और पूरी परियोजना बेकार साबित हो सकती है. ऐसे में नुकसान केवल ग्रामीणों का नहीं बल्कि शासन और जनता के उस पैसे का भी होगा जो विकास कार्यों के लिए खर्च किया जाता है.
लोगों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर होने वाले निर्माण कार्यों में पारदर्शिता की कमी के कारण भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है.
कलेक्टर से उच्चस्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष, तकनीकी और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है. उन्होंने सड़क की मोटाई, उपयोग की गई सामग्री, निर्माण प्रक्रिया तथा भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई हो बल्कि शासकीय राशि की वसूली भी सुनिश्चित की जाए.
जनता पूछ रही है जवाब
जिलहड़ी की यह सड़क अब केवल एक निर्माण कार्य नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा बन गई है. सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएगा या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
फिलहाल ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ रहा है और उनकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं. यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बन सकता है. वहीं यदि आरोप गलत हैं तो प्रशासन के लिए जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करना भी उतना ही जरूरी है. जनता अब जवाब चाहती है और जिलहड़ी की सड़क उस जवाब का इंतजार कर रही है.
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