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टीकमगढ़ के ग्रे वॉटर प्रबंधन को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार, गंदे पानी से मुक्ति के मॉडल को मिली देश में पहचान

Tikamgarh greywater management model receives national award

टीकमगढ़ के ग्रे वॉटर प्रबंधन को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

Tikamgarh News: मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है. गांवों की गलियों में बहते गंदे पानी, कीचड़ और जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए किए गए अभिनव प्रयोग को आईएससी-फिक्की स्वच्छता पुरस्कार में ग्रे वॉटर प्रबंधन श्रेणी में राष्ट्रीय विजेता चुना. नई दिल्ली में आयोजित समारोह में टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय, तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ नवीत कुमार धुर्वे और जिला समन्वयक मनीष जैन ने यह पुरस्कार ग्रहण किया. खास बात ये है कि जिस प्रयोग की शुरुआत एक गांव से हुई थी, वो महज दो साल में 225 गांवों तक पहुंच गया.

घर के बाहर बनाए गए सिल्ट चैंबर

टीकमगढ़ के चंद्रपुरा गांव से शुरू हुई भूमिगत जल निकासी व्यवस्था को जिला प्रशासन ने मॉडल के तौर पर दूसरे गांवों में भी लागू किया. इस व्यवस्था में घरों से निकलने वाले स्नान, कपड़े धोने और रसोई के पानी को खुले में बहने से रोकने के लिए घरों के बाहर सिल्ट चैम्बर बनाए जाते हैं. इन चैम्बरों को करीब 8 इंच के पाइप से जोड़ा जाता है और पानी को भूमिगत पाइपलाइन के जरिए गांव के अंतिम छोर तक पहुंचाया जाता है. जहां सोख्ता गड्ढे के जरिए पानी का निस्तारण किया जाता है, यानी जिस गंदे पानी की वजह से कभी गांव की गलियां कीचड़ से सराबोर रहती थीं, उसी समस्या का समाधान अब जमीन के नीचे पाइपलाइन बिछाकर किया जा रहा है. इसका असर गांवों की तस्वीर पर भी दिखाई दे रहा है.

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‘संकल्प, विश्वास और प्रयासों का परिणाम’

कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने इस उपलब्धि को ग्राम पंचायतों के संकल्प, विश्वास और प्रयासों का परिणाम बताया है. उन्होंने कहा कि चंद्रपुरा से शुरू हुई यह पहल अब 225 गांवों तक पहुंच चुकी है और इसका उद्देश्य सिर्फ भूमिगत पाइपलाइन बिछाना नहीं, बल्कि गांवों की जीवन गुणवत्ता और ग्रामीण परिवेश को बदलना है. एक गांव से शुरू हुआ प्रयोग, आज 225 गांवों तक पहुंच गया है और अब राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. टीकमगढ़ का ये मॉडल बताता है कि अगर स्थानीय समस्या का स्थानीय समाधान, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी एक साथ आए, तो गांव की तस्वीर बदली जा सकती है.

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