Ujjain News: मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां महज दो साल के मनवीत को पुलिस विभाग में बाल आरक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई है. ड्यूटी के दौरान पिता की मौत के बाद परिवार को यह सहारा मिला है. अभी मां की गोद में बैठकर नियुक्ति पत्र लेने वाला मनवीत 18 साल की उम्र पूरी करने और दसवीं पास करने के बाद नियमित पुलिस सेवा में शामिल हो सकेगा. तब तक परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता मिलती रहेगी.
मां की गोद में मिला नियुक्ति पत्र
मनवीत अपनी मां ज्योति कुंवर के साथ उज्जैन एसपी कार्यालय पहुंचा था. यहां पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर उसे नियुक्ति पत्र सौंपा. इस दौरान एसपी ने नन्हे मनवीत को चॉकलेट खिलाकर दुलार भी किया. यह दृश्य भावुक करने वाला था. जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, उस उम्र में मनवीत को अपने पिता की जगह पुलिस विभाग से जुड़ने का सहारा मिला है.
26 जनवरी को ड्यूटी के दौरान हुई थी पिता की मौत
मनवीत के पिता रणजीत सिंह डोडिया मध्य प्रदेश पुलिस में आरक्षक थे और मंदसौर जिले में पदस्थ थे. 26 जनवरी 2026 को सेवा के दौरान सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी. उनके परिवार में पत्नी ज्योति कुंवर, दो बेटियां और दो साल का बेटा मनवीत है. पति को खोने के बाद ज्योति कुंवर ने बेटे के लिए अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन किया था.
मंदसौर में पद नहीं मिला तो उज्जैन भेजा गया मामला
मंदसौर जिले में पद उपलब्ध नहीं होने के कारण नियुक्ति से जुड़ा प्रकरण वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से उज्जैन एसपी कार्यालय भेजा गया. जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मनवीत को बाल आरक्षक के पद पर नियुक्ति दी गई. इस फैसले से परिवार को आर्थिक मदद मिलने का रास्ता खुला है.
18 साल की उम्र में संभालेगा पुलिस सेवा की जिम्मेदारी
पुलिस विभाग के अनुसार, मनवीत को अभी ड्यूटी नहीं करनी होगी. निर्धारित नियमों के तहत 18 वर्ष की उम्र पूरी करने और दसवीं कक्षा पास करने के बाद उसे नियमित सेवा में शामिल किया जाएगा. तब तक उसे नियमों के अनुसार नव आरक्षक के वेतन का आधा हिस्सा दिया जाएगा. इससे परिवार को बच्चों की पढ़ाई, परवरिश और दूसरी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी.
मध्य प्रदेश में अपनी तरह का पहला मामला
पुलिस विभाग के मुताबिक, प्रदेश में इतनी कम उम्र के बच्चे को बाल आरक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने का यह पहला मामला है. मनवीत अभी अपने पिता की वर्दी और जिम्मेदारियों को समझने के लिए बहुत छोटा है, लेकिन इस नियुक्ति से उसके परिवार को भविष्य के लिए आर्थिक संबल मिला है. पिता की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती, मगर विभाग की इस पहल ने परिवार को आगे बढ़ने की एक नई उम्मीद जरूर दी है.
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