मऊगंज में शराब माफियाओं का खुला खेल! अधिकारियों के आगे बेबस आबकारी निरीक्षक? “जीरो टॉलरेंस” नीति पर उठे बड़े सवाल

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में शराब कारोबार को लेकर अब बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं. जिले में संचालित शराब दुकानों को चार अलग-अलग कंपनियों के माध्यम से ठेके पर संचालित किया जा रहा है
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गांवों की गलियों तक फैला शराब कारोबार

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में शराब कारोबार को लेकर अब बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं. जिले में संचालित शराब दुकानों को चार अलग-अलग कंपनियों के माध्यम से ठेके पर संचालित किया जा रहा है, लेकिन आरोप है कि यही कंपनियां अब लाइसेंस की आड़ में गांव-गांव अवैध शराब बिक्री का नेटवर्क चला रही हैं. ग्रामीण क्षेत्रों तक शराब की खुलेआम सप्लाई होने से युवा पीढ़ी तेजी से नशे की गिरफ्त में जाती दिखाई दे रही है, जबकि जिम्मेदार विभाग मौन साधे बैठा है.

जानकारों की मानें तो जिले में शराब कारोबार अब केवल लाइसेंसी दुकानों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि गांवों की गलियों तक फैल चुका है. कई ग्रामीण क्षेत्रों में किराना दुकानों, ढाबों और गुप्त ठिकानों से शराब बिकने की चर्चाएं जोरों पर हैं. देर रात तक शराब की सप्लाई होने के आरोप लग रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति दिखाई दे रही है. यही वजह है कि अब आबकारी विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.

शराब दुकानों में खुली लूट! न रेट सूची… न नियम… सिर्फ मनमानी वसूली!

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले की कई शराब दुकानों में शासन द्वारा निर्धारित रेट सूची तक प्रदर्शित नहीं की गई है. ग्राहकों से बोतलों पर मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं. निर्धारित मूल्य से अधिक रकम लेना अब आम बात बन चुकी है. कई ग्राहकों का कहना है कि विरोध करने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार तक किया जाता है. इससे आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है.

आबकारी नियमों के अनुसार प्रत्येक दुकान में रेट सूची लगाना अनिवार्य है, लेकिन मऊगंज में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ती दिखाई दे रही हैं. सवाल यह उठ रहा है कि यदि नियमित जांच और निरीक्षण हो रहे हैं, तो आखिर दुकानों में रेट सूची क्यों नहीं लगी है और ओवररेटिंग का खेल कैसे जारी है?

जीरो टॉलरेंस सिर्फ भाषणों तक?

जिला प्रशासन लगातार “जीरो टॉलरेंस” नीति की बात करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रहे हैं. खुलेआम अवैध शराब बिक्री, ओवररेटिंग और नियमों के उल्लंघन के बावजूद कोई बड़ी कार्रवाई न होना लोगों के मन में कई शंकाएं पैदा कर रहा है.

ग्रामीणों का आरोप है कि मऊगंज का आबकारी विभाग “बैसाखी” के सहारे चल रहा है. लोगों का कहना है कि आबकारी विभाग के कई अधिकारी रीवा में बैठकर एसी कमरों की हवा खा रहे हैं और जिले में चल रहे शराब माफियाओं के खेल पर आंखें मूंदे हुए हैं. आरोप तो यहां तक लग रहे हैं कि संरक्षण के बिना इतना बड़ा नेटवर्क संचालित होना संभव नहीं है.

युवा पीढ़ी पर पड़ रहा गंभीर असर

गांव-गांव शराब की उपलब्धता ने युवाओं को तेजी से नशे की ओर धकेल दिया है. महिलाओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि शराब के कारण घरेलू विवाद, अपराध और सड़क हादसों जैसी घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. ग्रामीणों ने प्रशासन से विशेष अभियान चलाकर अवैध शराब बिक्री पर रोक लगाने की मांग की है.

जनता की मांग- अब चाहिए बड़ी कार्रवाई!

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि जिले की सभी शराब दुकानों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, प्रत्येक दुकान में अनिवार्य रूप से रेट सूची लगवाई जाए, ओवररेटिंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो और गांव-गांव हो रही अवैध शराब बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए. साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग उठने लगी है.

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विस्तार न्यूज़ की खबर के बाद जिला प्रशासन वास्तव में अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को जमीन पर उतारेगा, या फिर शराब माफियाओं का यह खेल यूं ही बेखौफ चलता रहेगा?

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