Chanakya Neeti Rules: जब रास्ते बंद और जीवन लगे अकेला, तो याद रखें चाणक्य नीति की ये 10 बातें
Chanakya Neeti Rules: आज की इस स्वार्थ भरी दुनिया में कहने को तो सब अपने होते हैं, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर कोई काम नहीं आता. मनुष्य के जीवन में कई ऐसे पड़ाव आते हैं जब उसे किसी न किसी के सहयोग की आवश्यकता होती है, लेकिन वह स्वयं को अकेला पाता है. उसका साथ देने के लिए कोई आगे नहीं आता. ऐसी स्थिति में अक्सर वह व्यक्ति मानसिक और शारीरिक, दोनों रूप से खुद को कमजोर मानने लगता है. इन्हीं परिस्थितियों से मुक्ति पाने और जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के लिए आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में बहुत ही सरल तरीके से अपनी बातें लिखी हैं.
आचार्य चाणक्य अपनी इन बातों के जरिए लोगों को बताना चाहते हैं कि हम सब स्वर्ग और नरक लोक से आए हैं. जो भी इस दुनिया में आया है उसे एक न एक दिन यहां से जाना ही है, इसलिए किसी के जाने का शोक नहीं करनी चाहिए.
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि आज के दौर में जिसके भी पास ज्ञान का भंडार है, वही सबसे ज्यादा शक्तिशाली है. जिस तरह खरगोश शारीरिक रूप से कमजोर होता है, लेकिन अपनी बुध्दि से शेर को भी हरा सकता है, ठीक उसी तरह इंसान को भी मानसिक रूप में मजबूत बनना चाहिए.
उनके इन बातों का कहने का मतलब है कि कभी भी किसी परिस्थिति में अपनों का साथ नहीं छोड़ना चाहिए. अगर आप अपनों का साथ छोड़कर दूसरे से हाथ मिलाते हैं तो आपका हाल वही होगा, जो एक अधर्मी व्यक्ति का होता है.
चाणक्य के अनुसार, एक कड़कती हुई बिजली एक विशाल पहाड़ को तोड़ देती है, लेकिन क्या बिजली पहाड़ से बड़ी है. इसलिए किसी भी चीज का आकार कितना है इससे कोई अंतर नहीं होता है.
वहीं चाणक्य अपनी नीति में लिखते हैं, जिस व्यक्ति में हमेशा कुछ न कुछ जानने की इच्छा और दिमाग में स्थिरता बनी रहती है, वही व्यक्ति शक्तिशाली माना जाता है.
चाणक्य अपनी नीति में बताते हैं कि जो व्यक्ति अपने घर गृहस्थी के कामों में पूरा समय लगा देता है. वह कभी भी ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता है.
आज हर कोई शारीरिक रूप से मजबूत होने के लिए मांस का सेवन कर रहा है. इसी बात को लेकर आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति मांस खाता है वह कभी किसी को माफ नहीं कर सकता, क्योंकि उसके अंदर हृदय नाम की कोई चीज नहीं होती.
चाणक्य कहते हैं, जो व्यक्ति लोभी यानी लालची होता है, वह कभी किसी से सही बातें नहीं बता सकता है. वह केवल आपसे स्वार्थ के लिए ही बातें करेगा. इसलिए ऐसे लोगों से बच कर ही रहना चाहिए.
चाणक्य का कहना है, जो व्यक्ति व्यभिचारी होता है उसके अंदर कभी भी शुद्धता नहीं आ सकती.
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि नीम का वृक्ष कभी मीठा नहीं हो सकता चाहे आप उसको शिखा से मूल तक घी और शक्कर से सींच दें. इसका अर्थ है कि आप बुरे इंसान को कितना भी समझा लीजिए वह हमेशा बुरे रास्ते पर ही चलेगा.