Republic Day: 26 जनवरी पर तिरंगे को फहराने वाली रस्सी कहां से आती है? जानिए
Republic Day Rope Tricolour: गणतंत्र दिवस हर भारतीय के लिए किसी त्योहार की तरह होता है. देशभर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और उत्सवों के बीच खुशी का माहौल बना रहता है. इस दिन देश के कोने-कोने में भारत का तिरंगा बड़े शान से लहराता हुआ दिखाई देता है.
तिरंगा हर भारतीय की आन-बान और शान है. हर भारतीय इसे बचाने के लिए अपने प्राण न्योछावर करने को तैयार रहता है.
दिल्ली के सदर बाजार की एक पुरानी दुकान 'गोरखी मल धनपत राय जैन' से आजादी के बाद से ही गणतंत्र दिवस पर झंडा फहराने वाली खास रस्सी भेजी जा रही है.
इस परंपरा की शुरुआत 1947 में हुई, जब पहली बार यहां से स्वतंत्रता दिवस के लिए रस्सी भेजी गई थी. इसके बाद 1950 में देश के पहले गणतंत्र दिवस से ही राष्ट्रपति द्वारा किए जाने वाले ध्वजारोहण के लिए भी रस्सी इसी दुकान से जाने लगी.
नरेश जैन अपनी पारिवारिक विरासत की पांचवीं पीढ़ी के रूप में इस दुकान को संभाल रहे हैं. नरेश जैन के अनुसार, तिरंगे की रस्सी बनाना केवल व्यापार नहीं, बल्कि गर्व और राष्ट्र सेवा का अवसर है.उन्हें खुशी है कि वे इस माध्यम से देश के गौरवपूर्ण पलों का हिस्सा बनते हैं.
नरेश जैन ने बताया कि साल 2001 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल से यह परंपरा शुरू हुई कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के ध्वजारोहण के लिए रस्सी फ्री में दी जाएगी, तब से आज तक से आज तक रस्सी फ्री में दी जा रही है.
अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तक, देश की कई महान हस्तियां इसी रस्सी से तिरंगा फहरा चुकी हैं.
हर साल सेना पूरे सम्मान के साथ यह रस्सी ले जाती है और गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण के बाद इसे वापस लौटा दिया जाता है.
ध्वजारोहण के बाद सरकार इस रस्सी को सरकारी मुहर और प्रमाणपत्र के साथ सम्मानपूर्वक लौटा देती है. साथ ही सेना की ओर से प्रशंसा पत्र भी दिया जाता है, जिसे गोरखी मल धनपत राय जैन फर्म आज भी सुरक्षित रखती है.