दादी की प्यारी ‘चीनी’ की कहानी, इंजीनियरिंग छोड़ी बनीं पायलट, शांभवी पाठक की यादें अब तस्वीरों में रह गईं
Shambhavi Pathak: शांभवी का बचपन ग्वालियर में बीता. उन्होंने इंजीनियरिंग की राह छोड़कर पायलट का करियर चुना. उन्होंने न्यूजीलैंड से पायलट ट्रेनिंग पूरी की. इसके बाद वे मध्य प्रदेश फ्लाइंग क्लब से जुड़ी रहीं.
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विनय कुशवाहा
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Last Updated: Jan 29, 2026 01:49 PM IST
शांभवी पाठक के दादा और पिता वायुसेना में रहे. कड़े अनुशासन के बीच जन्मीं शांभवी पाठक बचपन से ही होनहार छात्रा रहीं. उन्होंने शुरुआती स्कूल एजुकेशन ग्वालियर में पूरी की, इसके बाद वे माता-पिता के साथ दिल्ली चली गईं.
शांभवी का बचपन ग्वालियर में बीता. उन्होंने इंजीनियरिंग की राह छोड़कर पायलट का करियर चुना. उन्होंने न्यूजीलैंड से पायलट ट्रेनिंग पूरी की. इसके बाद वे मध्य प्रदेश फ्लाइंग क्लब से जुड़ी रहीं.
शांभवी पाठक को लंबी उड़ानों के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा था. वे लेयरजेट-45 विमान के जरिए वीआईपी गेस्ट को सफर कराती थी.
वे वीआईपी गेस्ट के साथ उड़ान भरती थीं, जिनमें मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव भी शामिल रहे. बताया जाता है कि वे पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की कार्यशैली से प्रभावित थी.
जब भी वे ग्वालियर आती थीं तो दादी मीरा पाठक के वसंत विहार स्थित घर में रुकती थीं.
शांभवी अपनी दादी की चहेती थीं. दादी मीरा पाठक प्यार से उन्हें 'चीनी' कहती थीं.
बारामती प्लेन क्रैश से लगभग 2 घंटे पहले सुबह करीब 6.34 बजे शांभवी ने दादी को व्हाट्सएप मैसेज किया था. इस मैसेज में लिखा था गुड मॉर्निंग, दद्दा.
प्लेन क्रैश की जानकारी मिलते ही दादी भावुक हो गईं थीं. उन्होंने मैसेज के बारे में कहा था कि वो ऐसा कभी नहीं करती थी.