Diwali Nishith Kaal 2026: दीवाली का त्योहार मां लक्ष्मी की पूजा और सुख-समृद्धि की कामना के लिए खास माना जाता है. इस दिन शाम के समय तो पूजा की जाती ही है, लेकिन आधी रात को भी विशेष पूजा का महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या का रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि की आशीर्वाद देती हैं. इसी वजह से दीवाली की रात निशीथ काल में पूजा करना शुभ माना जाता है. इसे महानिशा भी कहा जाता है. आइए जानते हैं कि निशीथ काल क्या होता है और इस समय पूजा करने का क्या महत्व है.
क्या होता है निशीथ काल?
ज्योतिषियों के अनुसार, रात के चार प्रहर होते हैं. इनमें आधी रात के आसपास के समय को निशीथ काल कहा जाता है. दीवाली की रात को धार्मिक मान्यताओं में कालरात्रि और महानिशा के नाम से भी जाना जाता है. इस समय को पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना गया है. मान्यता है कि इस दौरान मां लक्ष्मी की आराधना करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है.
कब होता है निशीथ काल?
- ज्योतिषियों के अनुसार, निशीथ काल सामान्य तौर पर रात 11:30 बजे से मध्यरात्रि 12:30 बजे तक माना जाता है.
- हालांकि, इसकी सही स्थान और पंचांग के अनुसार अलग हो सकती है.
- इस समय को साधना के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है.
मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीवाली की आधी रात को मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं. इसलिए भक्त इस दौरान घर में दीपक जलाकर देवी की स्वागत अकरती हैं. साथ ही लक्ष्मी मंत्रों का जाप और पूजा-अर्चना करते हैं. माना जाता है कि ऐसा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है.
साधना के लिए भी खास है यह रात
शास्त्रों में महानिशा को मां काली और महासरस्वती की साधना के लिए भी उत्तम बताया गया है. तंत्र परंपरा में इस समय मंत्र जाप और स्तोत्र पाठ का विशेष मत्व है. मान्यता है कि निशीथ काल में की गई साधना का फल अधिक मिलता है. यही वजह है कि दीवाली की रात इस समय पूजा करने की परंपरा चली आ रही है.
