Navratri Kanya Bhojan: देशभर में नवरात्रि का जश्न देखने को मिल रहा है. चारों तरफ उत्साह का माहौल है. भक्त माता रानी की पूजा-अर्चना में लीन हैं. शास्त्रों में कन्या पूजन का विशेष महत्व बताया गया है. नवरात्रि के किसी भी दिन कन्याओं को भोजन कराने से माता रानी की कृपा होती है. वहीं कन्या भोजन से जीवन के सभी कष्ट और दुख दूर होते हैं और घर में सुख-शांति बना रहती है. ज्यादातर लोग कन्या भोजन महाष्टमी और नवमी के दिन कराते हैं. ऐसे में अगर आप भी अपने घर पर कन्या भोजन कराने वाले हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि आप पर माता रानी की कृपा बनी रहे.
कन्या पूजन के जरूरी नियम
कन्याओं की संख्या का ध्यान रखें
कन्या पूजन में 9 कन्याएं मां दुर्गा के नौ रूपों के समान मानी जात हैं. अगर 9 कन्याएं न मिल पाएं तो आप 3, 5 या 7 कन्याओं के साथ भी पूजन कर सकते हैं.
बालक को भी बुलाएं
कन्या पूजन के साथ एक छोटे बालक को जरूर बुलाएं, जिसे बटुक भैरव या लांगूरा कहा जाता है. माना जाता है कि बटुक के बिना कन्या पूजन अधूरा रहता है.
पैरों को धोएं
कन्याओं के घर आने पर सबसे पहले अपने हाथों से उनके पैरों को साफ पानी से धोएं और साफ कपड़े से पोंछें. इसके बाद सभी को साफ आसन पर बैठाएं.
रोली से तिलक करें
सभी कन्याओं के पैरों में आलता लगाएं और रोली व अक्षत से तिलक करें. साथ ही उन्हें लाल चुनरी ओढ़ाएं या माथे पर बांधें.
कन्याओं को क्या खिलाएं
कन्याओं को सूजी का हलवा, काले चने, खीर और पूड़ी खिलाना सबसे उत्तम माना जाता है. आप चाहें तो बिना प्याज-लहसुन के आलू या छोले की सब्जी भी बना सकते हैं.
दक्षिणा और उपहार दें
भोजन के बाद कन्याओं और बटुक को अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा और उपहार जरूर दें. फिर सभी के पैर छूकर आशीर्वाद लें और अगले साल फिर आने का निमंत्रण देकर विदा करें.
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देवी मां को पहले भोग लगाएं
बता दें कि कन्या पून से पहले बने हुए भोजन का भोग ससे पहले देवी मां को लगाएं, उसके बाद कन्याओं को खिलाना शुरू करें.
