Navratri Saraswati Puja Guide: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि के दौरान सरस्वती पूजा का विशेष महत्व है. मां सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, विद्या, संगीत और कला की देवी माना जाता है. विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक और कलाकार विशेष रूप से उनकी पूजा करते हैं. वसंत पंचमी पर उनकी मुख्य पूजा होती है, लेकिन नवरात्रि में भी विद्या की देवी की आराधना बहुत शुभ मनी जाती है.
अक्टूबर 2026 में सरस्वती पूजा कब है?
शारदीय नवरात्रि में सरस्वती पूजा दो दिन की होती है. पहले दिन आवाहन और दूसरे दिन प्रधान पूजा होती है. इस साल मां सरस्वती क आवाहन 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को होगा. जबकि प्रधान पूजा 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को की जाएगी.
सरस्वती आवाहन क्या है?
सरस्वती आवाहन का सीधा सा मतलब है मां सरस्वती को बुलाना या उन्हें आमंत्रित करना. पूजा शुरू करने से पहले भक्त देवी की ध्यान करते हैं और उनसे अपनी पूजा स्वीकार करने की विनती करते हैं. इस खास दिन पर माता की आदर-सत्कार के साथ स्वागत किया जाता है. इस साल 16 अक्टूबर 2026 को मूल नक्षत्र में मां सरस्वती के आवाहन का शुभ मुहूर्त दोपहर 03:33 बजे से लेकर शाम 05:50 बजे तक रहेगा.
सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
17 अक्टूबर को होने वाली प्रधान पूजा ज्ञान और बुद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. इस दिन पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र रहेगा. पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 03:32 बजे से शाम 05:49 बजे तक रहेगा.
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सरस्वती पूजा की आसान विधि
- सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को अच्छे से साफ करें.
- एक साफ चौकी पर मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.
- मां को सफेद या पीले फूल, अक्षत, फल, मिठाई और धूप-दीप अर्पित करें.
- अपनी किताबें, कॉपी, कलम या संगीत से जुड़ी चीजें पूजा स्थल पर रखें.
- मां सरस्वती के मंत्रों का जाप करें और ज्ञान व सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें.
- अंत में आरती करें और सभी को प्रसाद बाटें.
- अगर आप पूरे विधि विधान के साथ मां सरस्वती की पूजा अर्चना करते हैं तो आपके सारे मनोकामनाएं पूर्ण होंगी और आपके घर में सुख-शांति बनी रहेगी.
मां सरस्वती का कौन-सा मंत्र जपें?
पूजा के समय मां सरस्वती के प्रसिद्ध मंत्र ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नम:’ का जाप किया जा सकता है.
