37 साल का सूखा खत्म, न्यूज़ीलैंड ने भारत में पहली बार जीती ODI सीरीज, टीम इंडिया की हार के ये रहे बड़े कारण
टीम इंडिया
IND vs NZ: भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेली गई तीन मैचों की वनडे सीरीज का अंत भारतीय फैंस के लिए किसी झटके से कम नहीं रहा. इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेले गए निर्णायक मुकाबले में 41 रनों की हार के साथ ही भारत ने पहली बार अपनी सरजमीं पर न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज गंवा दी. न्यूजीलैंड ने भारत को उसके ‘अजेय’ किले इंदौर में हराकर इतिहास रच दिया. 338 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम 296 रनों पर ही सिमट गई. आइए जानते हैं कि आखिर कहां चूक हुई.
टॉप-ऑर्डर का बार-बार फेल होना
इस सीरीज में भारतीय टीम की सबसे बड़ी कमजोरी टॉप-ऑर्डर रहा. रोहित शर्मा और शुभमन गिल जैसी जोड़ी टीम को वह ठोस शुरुआत देने में नाकाम रही, जिसकी दरकार 300+ के लक्ष्यों में होती है. कप्तान गिल ने खुद स्वीकार किया कि सेट होने के बाद गैर-जिम्मेदाराना शॉट खेलकर आउट होना टीम को भारी पड़ा.
New Zealand register a 41-run victory in the decider and win the series 2-1
— BCCI (@BCCI) January 18, 2026
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‘गंभीर युग’ में खराब फील्डिंग का स्तर
कोच गौतम गंभीर अपनी आक्रामकता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन मैदान पर भारतीय खिलाड़ियों की सुस्ती ने सबको हैरान कर दिया. इंदौर वनडे में भी भारत ने कम से कम 2-3 महत्वपूर्ण कैच टपकाए. खराब ग्राउंड फील्डिंग के कारण न्यूजीलैंड ने कम से कम 15-20 अतिरिक्त रन बटोरे. छोटे मैदानों पर ऐसी गलतियां मैच का पासा पलट देती हैं.
मिडिल ओवर्स में विकेटों का अकाल
भारतीय गेंदबाजों ने नई गेंद से तो अच्छी शुरुआत की, लेकिन बीच के ओवरों में कीवी बल्लेबाजों पर अंकुश लगाने में नाकाम रहे. कुलदीप यादव और रवींद्र जडेजा जैसे अनुभवी स्पिनर्स इस सीरीज में संघर्ष करते दिखे. जडेजा ने तो इस सीरीज में एक भी विकेट नहीं निकाला. विकेट न मिलने के कारण डेरिल मिचेल जैसे बल्लेबाजों को क्रीज पर जमने का मौका मिला, जिन्होंने पूरी सीरीज में 352 रन बनाकर भारत की हार तय कर दी.
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डेरिल मिचेल का ‘विराट’ अवतार
न्यूजीलैंड की जीत के सबसे बड़े नायक रहे डेरिल मिचेल. उन्होंने इस सीरीज में 176 की अविश्वसनीय औसत से बल्लेबाजी की. उनके दो शतकों ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की बखिया उधेड़ दी. भारतीय गेंदबाज उनके लिए कोई सटीक रणनीति (जैसे सटीक बाउंसर या यॉर्कर) नहीं बना सके, जिसका खामियाजा सीरीज गँवाकर भुगतना पड़ा.