भगत सिंह के लिए धर्म का अस्तित्व समाज में सवाल खड़ा करने का था, न कि किसी मान्यता से जुड़ा हुआ. उनका कहना था, "अगर कोई इंसान, जो अंधविश्वास का पालन करता है, वह समाज को आगे नहीं ले जा सकता."
1954 में डायरेक्टर जगदीश गौतम ने फिल्म 'शहीद-ऐ-आजम' बनाई, जिसमें प्रेम अदीब ने भगत सिंह का किरदार निभाया. यह फिल्म न केवल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक भगत सिंह के जीवन को दर्शाती थी, बल्कि इसने एक पूरी पीढ़ी को प्रेरित किया. प्रेम अदीब की शानदार एक्टिंग और फिल्म की संजीदगी ने दर्शकों के दिलों में भगत सिंह की छवि को मजबूती से बैठा दिया.