पाकिस्तान में क्रिप्टो काउंसिल बनी, और सिर्फ एक महीने के अंदर ही उसने दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज बायनेन्स के संस्थापक चांगपेंग झाओ को अपना सलाहकार बना लिया. इसका मकसद था इस्लामाबाद को दक्षिण एशिया की "क्रिप्टो राजधानी" बनाना. लेकिन असली खेल तो तब शुरू हुआ, जब इस डील को फाइनल करने के लिए अमेरिका से एक हाई-प्रोफाइल टीम इस्लामाबाद पहुंची.
Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अपने ही बयान पर यू-टर्न देखने-सुनने को मिल रहा है. ट्रंप ने अपने पिछले बयानों से यू-टर्न लेते हुए कहा कि उन्होंने दोनों देशों के बीच केवल 'मदद' की है.
ट्रंप भले ही धमकियां दें. व्यापार बंद करने की बात कहें, लेकिन भारत को कोई टेंशन नहीं है. क्यों? क्योंकि भारत की ताकत आज किसी से छिपी नहीं है. भारत में एप्पल जैसी कंपनियां इसलिए आ रही हैं, क्योंकि यहां सस्ता प्रोडक्शन और बड़ा बाजार है.
IND-PAK Tension: प ने कहा था कि अमेरिका ने दोनों देशों को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने जंग तुरंत नहीं रोकी तो अमेरिका उनके साथ व्यापार नहीं करेगा. मगर अब भारत ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे को खारिज कर दिया है.
IND-PAK Tension: सीजफायर को लेकर ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर भारत-पाकिस्तान के इस कदम को ऐतिहासिक और मानवीय बताया है. इसके साथ ही उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर भी पोस्ट लिखा है.
Operation Sindoor: भारतीय सेना की इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की मीडिया फेक न्यूज भी फैलाने में जुट गई है. पुराने फोटो-वीडियोज के जरिये पाकिस्तान गुमराह करने की कोशिश कर रहा है कि भारत के एक्शन से उसे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है.
Pahalgam Terror Attack: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहलगाम हमले पर एक बड़ा बयान दे दिया है. उनके इस बयान की अब हर जगह चर्चा हो रही है.
प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि वे ट्रंप सरकार के तानाशाही जैसे रवैये का विरोध कर रहे हैं. वे चाहते हैं कि अमेरिका का लोकतंत्र सुरक्षित रहे. आंदोलन की प्रवक्ता हीदर डन ने बताया कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और किसी तरह की हिंसा का इरादा नहीं है.
पन्नू जैसे खालिस्तानी समर्थक अमेरिका से भारत-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं. ट्रंप की नीति से अमेरिका में ऐसे संगठनों की फंडिंग, गतिविधियों और सुरक्षित ठिकानों पर नकेल पड़ सकती है. हैप्पी पासिया की गिरफ्तारी से खालिस्तानी नेटवर्क में डर का माहौल बन सकता है, क्योंकि अमेरिका अब ऐसे तत्वों को शरण देने से हिचक सकता है.
US Tariff: 7 दिन के अंदर ही ट्रंप को अपना फैसला वापस लेना पड़ा है. जिसके बाद बुधवार, 9 अप्रैल को राष्ट्रपति ट्रंप ने 75 से ज्यादा देशों पर जैसे को तैसा यानी कि रेसिप्रोकल टैरिफ पर 90 दिनों के लिए रोक लगा दिया है.