जांच एजेंसी का कहना है कि कथित फर्जीवाड़े की पुष्टि के लिए संतोष वर्मा के हस्ताक्षर के नमूने जरूरी हैं. गिरफ्तारी के समय हस्ताक्षर लिए गए थे, लेकिन संबंधित दस्तावेज फिलहाल हाई कोर्ट की प्रक्रिया में हैं. ऐसे में पुलिस दोबारा नमूने लेना चाहती है, लेकिन आरोप है कि अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे.
बताया जा रहा है कि सेशन जज के ट्रांसफर के बाद अब एसआईटी की कार्रवाई और तेज हो जाएगी. बताया जा रहा है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब एसआईटी जल्द ही निलंबित जज विजेंद्र सिंह रावत से पूछताछ कर सकती है.