ईरानी गैंग बड़े दुकानों में जाकर सामान खरीदने के बहाने से व्यापारियों को भरोसे में लेते थे, और उन दुकानों को टारगेट करते थे, जिसमें सामान दिखाने वाला एक ही व्यक्ति रहता था.