वनाधिकार पट्टा धारकों को 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान भी कागजों तक सीमित दिख रहा है. वर्ष 2025-26 में 24 जिलों में एक भी परिवार को 150 दिन का रोजगार नहीं मिला. आदिवासी बहुल झाबुआ में 150 दिन रोजगार का आंकड़ा शून्य रहा.