न्यायालयीन स्तर पर भी कार्रवाई प्रभावी रही. विभिन्न विशेष न्यायालयों में 175 मामलों में चालान पेश किए गए. इसी अवधि में 66 मामलों में आरोपियों को सजा सुनाई गई. यह संकेत देता है कि जांच के साथ-साथ अभियोजन की प्रक्रिया भी मजबूत हुई है और दोष सिद्धि दर संतोषजनक रही.