भगत सिंह के लिए धर्म का अस्तित्व समाज में सवाल खड़ा करने का था, न कि किसी मान्यता से जुड़ा हुआ. उनका कहना था, "अगर कोई इंसान, जो अंधविश्वास का पालन करता है, वह समाज को आगे नहीं ले जा सकता."