ITR Refund: 31 दिसंबर के बाद भी मिल सकता है रिफंड, अपनाएं यह खास तरीका

ITR Refund: 31 दिसंबर के बाद 'बिलेटेड रिटर्न' फाइल करने का ऑप्शन खत्म हो जाता है. इसके बाद आपके पास ITR-U (Updated Return) फाइल करने का मौका तो होता है.
Tax Refund

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ITR Refund: 31 दिसंबर के बाद ‘बिलेटेड रिटर्न’ फाइल करने का ऑप्शन खत्म हो जाता है. इसके बाद आपके पास ITR-U (Updated Return) फाइल करने का मौका तो होता है, लेकिन नियम यह है कि ITR-U के जरिए आप रिफंड का दावा नहीं कर सकते. ऐसे में आपका अटका हुआ पैसा पाने का एकमात्र रास्ता ‘कंडोनेशन ऑफ डिले’ है.

कंडोनेशन ऑफ डिले क्या है?

इनकम टैक्स की धारा 119(2)(b) के तहत, यदि कोई टैक्स पेयर किसी ठोस कारण (Genuine Hardship) की वजह से समय पर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाया है, तो वह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से देरी माफ करने का अनुरोध कर सकता है. यदि विभाग आपकी दलील से संतुष्ट होता है, तो वह आपको समयसीमा बीतने के बाद भी रिफंड क्लेम करने की अनुमति दे सकता है

देरी माफी का अनुरोध केवल तभी स्वीकार किया जाता है जब रिफंड की राशि सही और जायज हो. इसके आलवा देरी के पीछे कोई गंभीर कारण हो (जैसे गंभीर बीमारी, परिवार में कोई दुर्घटना, या कोई तकनीकी गड़बड़ी). आपकी आय का आकलन करने के लिए कंडोनेशन आवेदन के साथ साक्ष्य मौजूद हों.

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कंडोनेशन रिक्वेस्ट कैसे फाइल करें?

  1. सबसे पहले इनकमटैक्स.जीओवी.इन पर खरीदार अपनी प्रॉपर्टी और पासवर्ड से लॉग इन करें.
  2. ‘सेवाएं’ टैग में विक्रेता ‘क्षमादान अनुरोध’ विकल्प चुनें.
  3. यहां ‘समय-बाधित के बाद आईटीआर दाखिल करने की अनुमति दें’ पर क्लिक करें और ‘माफी का अनुरोध बनाएं’ चुनें.
  4. निर्धारण वर्ष (2025-26), फ़्रॉसी की राशि और विलंब का कारण विस्तार से लिखें.
  5. यदि देरी का कारण बीमारी है, तो डॉक्टर का तर्क या मेडिकल रिपोर्ट अपलोड करें.
    6.आवेदन जमा करें. अब विभाग का अधिकारी (पीसीआईटी) आपके आवेदन की समीक्षा. मंजूरी मिलने के बाद ही आप अपनी रिटर्न फाइल कर लेंगे.

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