ग्रेच्युटी के लिए पांच साल का इंतजार खत्म… देश में लागू हुआ नया लेबर कोड, 2 दिन में होगा पाई-पाई का हिसाब

New Labour Code: देश में नया लेबर कोड लागू हो चुका है. इससे कई तरह के बदलाव हुए हैं. जैसे कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के महज 2 दिनों के भीतर ही फाइनल सेटलमेंट मिल जाएगा. इसके साथ ही ग्रेच्युटी के लिए पांच साल का इंतजार भी खत्म हो चुका है.
New Labour Codes

प्रतीकात्मक तस्वीर

New Labour Code: देश में एक अप्रैल 2026 से नया लेबर कोड लागू हो चुका है. यह नए न‍ियम करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए एक राहत भरे होने वाले हैं. अब नौकरी छोड़ने या फिर नौकरी से न‍िकाले जाने पर आपको अपने पैसों के लिए 45 दिन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा. नए नियमों के अनुसार कंपनी को आपको आपका पूरा पैसा कंपनी छोड़ने के महज 2 वर्किंग डेज के भीतर देना होगा.

‘कोड ऑन वेजेस 2019’ (Code on Wages, 2019) की धारा 17(2) के तहत यह प्रावधान किया गया है. अब तक कंपनियां अपने कर्मचारी को काम से निकालने या फिर नौकरी छोड़ने के बाद सेटलमेंट के लिए 45 से 90 दिनों का समय लेती थीं. इस लंबे स्ट्रक्चर के कारण कर्मचारियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा था.

फुल एंड फाइनल सेटलमेंट में क्या-क्या मिलेगा?

नौकरी छोड़ने बाद कर्मचारी को आखिरी महीने की सैलरी नहीं बल्कि उसकी छुट्टियों का  पैसा भी मिलेगा. आसान भाषा में कहा जाए तो  काम किए गए अंतिम दिनों की पूरी सैलरी दी जाएगी. बची हुई छुट्टियों (Earned Leaves) के बदले मिलने वाला पैसा मिलेगा. कर्मचारी के काम के  प्रदर्शन के आधार पर तय किया गया पिछला बकाया बोनस अगर आपकी कंपनी देती है तो वो भी दिया जाएगा. 

ग्रेच्युटी के लिए पांच साल का इंतजार खत्म

अब तक के नियमों के अनुसार कर्मचारी को कंपनी की तरफ से मिलने वाली ग्रेच्युटी पांच साल काम करने के बाद दी जाती थी. लेकिन नए नियमों के अनुसार इसमें भी अब बड़ा बदलाव किया गया है.  अब, फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए यह सीमा घटाकर महज 1 साल कर दी गई है. मतलब साफ है कि अगर आप किसी भी कंपनी में एक साल भी काम करते हैं तो कंपनी को आपको ग्रेच्युटी देनी होगी. ग्रेच्युटी का सारा पैसा कंपनी को नौकरी छोड़ने के एक महीने के भीतर ही देना होगा.

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नए नियमों पर लोगों की अलग-अलग राय

नए लेबर कोड को लेकर दो तरह की बातें हो रही हैं. एक वर्ग का कहना है कि महंगाई के समय में इन-हैंड सैलरी कम होना मुश्किल पैदा करेगा. इससे रोजमर्रा के खर्चों पर भी असर पड़ेगा. वहीं कुछ लोगों का मानना है कि भले ही अभी सैलरी थोड़ी कम हाथ में आएगी. लेकिन रिटायर होने के बाद यही पैसा उनके काम आएगा. 

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