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आजम खान को साधने की तैयारी? ताजीन फातिमा से मुलाकात के बाद UP में नए समीकरण की आहट

Azam Khan

आजम खान

UP Politics: उत्तर प्रदेश में चुनावी बिसात बिछाना शुरू हो गई है. तमाम राजनीतिक दलों ने पुराने नेताओं से संपर्क बनाना शुरू कर द‍िया है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर खींचतान के बीच अब आजम खान को लेकर भी नई सियासी चर्चाएं शुरू हो गई हैं.इन अटकलों को हवा तब मिली, जब पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामपुर पहुंचकर आजम खान की पत्नी और पूर्व विधायक ताजीन फातिमा से मुलाकात की. इसके बाद ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस आजम को अपने पाले में लाने की पूरी कवायत कर रही है.

स्‍वामी प्रसाद मौर्य की ये मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब वे हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी मुलाकात कर चुके हैं. इसके बाद उनके कांग्रेस के करीब आने की चर्चा तेज हुई है.ऐसे में रामपुर जाकर आजम खान के परिवार से मिलना राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है.

फातिमा से मुलाकात के बाद क्या बोले मौर्य?

फातिमा से मुलाकात के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने योगी सरकार पर आजम खान के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि आजम खान के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है. मौर्य ने यह भी कहा कि वह आजम खान के साथ पहले भी खड़े थे और आगे भी खड़े रहेंगे.

ताजीन फातिमा ने क्या कहा?

ताजीन फातिमा ने इस मुलाकात को लेकर साफ किया कि उनके बीच चुनाव या टिकट को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई. उन्होंने कहा कि मौर्य सिर्फ आजम खान और अब्दुल्ला की खैरियत पूछने आए थे. उन्होंने चुनाव से जुड़े सवाल पर भी कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान आजम खान को जेल से बाहर लाने पर है.

दरअसल, आजम खान और समाजवादी पार्टी के बीच रिश्तों को लेकर भी पिछले कुछ समय से तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं. कुछ दिन पहले ताजीन फातिमा की अखिलेश यादव से मुलाकात हुई थी. इसके बाद आजम खान की पसंद के उम्मीदवारों को पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर उतारने को लेकर कयास लगाए गए थे.

कांग्रेस के अंदर कुछ पक रहा क्या?

अब मौर्य की राहुल गांधी से मुलाकात और उसके बाद आजम खान के परिवार तक पहुंचने से कांग्रेस की रणनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि अभी तक कांग्रेस या आजम खान की ओर से किसी नए राजनीतिक समीकरण की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. ऐसे में यह मुलाकात सिर्फ राजनीतिक शिष्टाचार थी या 2027 के चुनाव से पहले किसी बड़े समीकरण की शुरुआत, इस पर निगाहें बनी हुई हैं. 

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