‘यह वह बांग्लादेश नहीं…’,प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक हुईं शेख हसीना, बोंली- ढाका जाऊंगी वापस
शेख हसीना
Sheikh Hasina speech: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत में रहते हुए पहली बार वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की. अपने संबोधन में उन्होंने बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर खुलकर बात की. इसमें उन्होंने कहा कि जिस देश के लिए लाखों लोगों ने कुर्बानी दी थी, आज वह उस रास्ते से भटक चुका है. भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि बांग्लादेश को विकास, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के रास्ते पर वापस लाना है.
शेख हसीना ने कहा कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का इरादा रखती हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें जेल जाने या किसी भी तरह के खतरे का डर नहीं है. उनका दावा था कि देश की जनता कठिन दौर से गुजर रही है. ऐसे समय में वह लोगों के बीच रहना चाहती हैं.
उन्होंने यह भी मांग की कि उनकी पार्टी अवामी लीग पर लगा प्रतिबंध हटाया जाए. पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं को राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति दी जाए.
संबोधन में हसीना ने क्या-क्या कहा?
अपने संबोधन में हसीना ने मौजूदा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि देश में आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है. बेरोजगारी बढ़ी है और लोकतांत्रिक संस्थाएं दबाव में हैं. उनका कहना था कि बांग्लादेश की पहचान और स्वतंत्रता संग्राम के मूल आदर्शों को कमजोर किया जा रहा है.
बांग्लादेशी सरकार ने जताई नाराजगी
शेख हसीना की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बांग्लादेश में तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली है. ढाका सरकार ने भारत में आयोजित इस कार्यक्रम पर कड़ा विरोध दर्ज कराया. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह का आयोजन दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक असर डाल सकता है. बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इसे अपनी संप्रभुता के प्रति असम्मान बताते हुए भारत के समक्ष आपत्ति भी जताई.
वहीं, भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि यह एक निजी कार्यक्रम था. इसके आयोजन में सरकार की कोई भूमिका नहीं थी. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत इस कार्यक्रम का आयोजक नहीं है. इसमें व्यक्त किए गए विचार संबंधित वक्ता के निजी विचार हैं.
बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन शुरू
बांग्लादेश में हसीना के बयान को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए. कई स्थानों पर उनके खिलाफ प्रदर्शन किए गए और उनकी आलोचना की गई. दूसरी ओर, उनके समर्थकों ने उनके संबोधन को लोकतंत्र की बहाली की अपील बताते हुए उनका समर्थन किया. शेख हसीना की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने एक बार फिर भारत-बांग्लादेश संबंधों और बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है.
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