इंदौर में सबसे पहले 2 बच्चों में मिले थे हैजा जैसे लक्षण, 38 नए मरीज आए सामने, कोलकाता की टीम जांच में जुटी
इंदौर: लोग टैंकर से पानी भरने को मजबूर
Indore Water Crisis: मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से मरने वालों का आंकड़ा 17 पहुंच गया है. स्वास्थ्य विभाग की टीम के सर्वे में 38 नए मरीज सामने आए हैं. निजी और सरकारी अस्पतालों को मिलाकर 398 मरीज एडमिट हैं, इनमें से 15 मरीज ICU में भर्ती हैं. दो मरीजों की हालत क्रिटिकल बताई जा रही है.
सबसे पहले दो बच्चों में मिले हैजा जैसे लक्षण
बताया जा रहा है कि इंदौर के भागीरथपुरा इलाके के दो बच्चों में हैजा जैसे लक्षण मिले थे. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक पहला बच्चा 28 दिसंबर को सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. जांच में पाया गया कि बच्चे में हैजा के लक्षण हैं. इसके दो दिन बाद यानी 30 दिसंबर को इसी क्षेत्र के एक और बच्चे को अस्पताल में एडमिट किया गया. इसी दौरान दूषित पानी पीने से बीमारों की संख्या बढ़ने लगी. इसके ही मौत का आंकड़ा धीरे-धीरे बढ़ता गया.
कोलकाता से आई टीम कर रही जांच
भागीरथपुरा इलाके के पानी की जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैक्टीरियोलॉजी (NIB) कोलकाता की टीम इंदौर आई है. इस टीम में साइंटिस्ट डॉ. प्रमित घोष, वैज्ञानिक डॉ. गौतम चौधरी और दिल्ली के NCDC के डॉ. अनुभव शामिल है. इस टीम के साथ राजधानी भोपाल की टीम, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीम भी जांच में जुटी हुई है.
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स्वास्थ्य विभाग की टीम डोर-टू-डोर कर रही सर्वे
स्वास्थ्य विभाग की भागीरथपुरा इलाके में डोर-टू-डोर सर्वे कर रही है. जिन लोगों में दूषित पानी पीने के बाद कोई लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उन्हें चिह्नित किया जा रहा है. इलाके में पांच एंबुलेंस को तैनात किया गया है. मरीजों को नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है. पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन की टैबलेट्स दी जा रही है. इसके साथ ही ओआरएस सॉल्यूशन और जिंक की गोली दी जा रही हैं.