MP News: दूषित पानी से जान जाने के बाद घरों में आरओ लगाने को मजबूर, इंदौर में क्रेडित कार्ड से खरीद रहे हैं लोग

इंदौर में भागीरथपुरा कांड के बाद से उनकी दुकानों पर आरओ और उसके पार्ट्स की डिमांड अचानक से बढ़ गई है.
After drinking contaminated water in Indore, people are forced to install RO in their homes.

इंदौर में दूषित पानी पीने के बाद घरों में लोग आरओ लगवाने को मजबूर हैं.

MP News: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से लोगों की जान जाने और बीमार होने के बाद अब लोग अपने घरों में आरओ लगाने को मजबूर हो गए हैं. यहां मजबूर इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि ज्यादातर लोग गरीब है, उनके पास आरओ लगवाने के रुपए नहीं है. लिहाजा अपनी और परिवार की जान बचाने के लिए लोग किराए पर, किश्तों पर या क्रेडिट कार्ड के माध्यम से आरओ खरीदकर अपने घरों में लगा रहे हैं.

हैसियत नहीं लेकिन किराए पर लेकर आए आरओ

इंदौर में भागीरथपुरा की रहने वाली भावना रूपाली की दूषित पानी पीने से कुछ दिनों पहले तबीयत बिगड़ी थी. इन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था. शासन की योजना की जानकारी के अभाव में उनके इलाज में परिजन ने अपनी जमा पूंजी लगा दी. जब वह स्वस्थ्य होकर घर लौटीं तो बच्चे ने सबसे पहले घर में आरओ लगाने की मांग की. लेकिन परिवार के पास 15 हजार रुपये एक मुश्त नहीं होने की वजह से वो 500 रुपये महीने के किराए पर आरओ लेकर आए हैं. लेकिन अब संकट यह है कि फिलहाल पूरे भागीरथपुरा में नर्मदा का पानी सप्लाई नहीं हो रहा, इससे उनके घर की टंकी नहीं भर पा रही और आरओ का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा.

वहीं बीकॉम सेकंड ईयर की एक स्टूडेंट कशिश भी दूषित पानी पीने से बीमार हो गई थी, जिसे इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था. 2 दिन पहले ही कशिश सही होकर घर लौटी है और आज उसके बड़े भाई ने घर में आरओ लगवा दिया. लेकिन यह आरओ भाई ने अपना क्रेडिट कार्ड स्वाइप करवाकर लिया है, क्योंकि उनके पास रुपये नहीं थे. अब क्रेडिट कार्ड का पेमेंट किश्तों में किया जाएगा. यह घर शैलेश साल्वी का है. शैलेश के घर पर कोई बीमार तो नहीं हुआ, लेकिन इसके पहले ही उन्होंने भी अपने घर में आरओ लगवा लिया. 8 हजार रुपये कीमत का आरओ वह एक मुश्त नहीं खरीद सकते थे तो 2 हजार रुपए का डाउन पेमेंट कर के बाकी किश्तों में लिया है, जिसे हर महीने चुकाएंगे.

पिता और बेटी की तबीयत बिगड़ने पर घर में आरओ लगवाया

साक्षी वर्मा के घर की कहानी थोड़ी अलग है. इनका परिवार सक्षम परिवार है, लेकिन इस परिवार में पहले साक्षी की बड़ी बहन दूषित पानी से बीमार हुई, निजी अस्पताल में उसका इलाज करवाया गया. वह ठीक हुई तो उसके बाद साक्षी के पिता की तबीयत खराब हो गई, उनका भी इलाज उसी हॉस्पिटल में करवाया गया. लेकिन इस बार उनके ब्लड सैंपल दिल्ली भेजे गए, जब इसकी रिपोर्ट आई तो पता चला कि दूषित पानी से दोनों पिता पुत्री की तबीयत बिगड़ी थी. इसके बाद डॉक्टर की सलाह पर परिवार ने आरओ लगाने का फैसला लिया.

फायदे में हैं आरओ बेचने वाले

इन सब के बीच जो सबसे ज्यादा फायदे में है, वो आरओ बेचने वाले हैं. भागीरथपुरा कांड के बाद से उनकी दुकानों पर आरओ और उसके पार्ट्स की डिमांड अचानक से बढ़ गई है.

आरओ लगाने के बाद से लोगों को उम्मीद है कि अब वे दूषित पानी नहीं पीएंगे. अपनी और परिवार की जान बचाने और उन्हें बीमार होने से बचाने के लिए लोग अपनी आर्थिक स्थितियों को देखते हुए अपनी हैसियत के अनुसार आरओ लगा रहे हैं. भले इसके लिए उन्हें इसकी ज्यादा कीमत ही क्यों न चुकानी पड़ी.

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