Bilaspur: जुआरी-सटोरियों पर पुलिस का एक्शन, अब नहीं सुधरे तो संपत्ति होगी कुर्क
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Bilaspur: बिलासपुर पुलिस ने अब अपराधियों पर सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि आर्थिक जड़ पर प्रहार की रणनीति अपना ली है. पहले नशा तस्करों पर करोड़ों की संपत्ति कुर्क कर उनकी कमर तोड़ी गई और अब यही ‘आर्थिक प्रहार वाला मॉडल’ जुआरी, सटोरियों और ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क पर लागू होने जा रहा है.
बिलासपुर पुलिस की नशा तस्करों की अवैध संपत्तियों की जब्ती की कार्रवाई जारी है. इसी कड़ी में अब आदतन जुआरी, खाईवाल और ऑनलाइन सट्टेबाज पुलिस के निशाने पर आ गए हैं. पुलिस इनकी संपत्ति और अपराध की कुंडली तैयार करने में जुट गई है.
नशा तस्करों की 7.40 करोड़ की संपत्ति कुर्क
पुलिस लगातार नशा तस्करों पर कार्रवाई कर रही है. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अब तक 19 नशा तस्करों की करीब 7 करोड़ 40 लाख रुपए की अवैध संपत्ति जब्त की जा चुकी है. इसमें बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, कवर्धा, बेमेतरा और ओडिशा तक फैली संपत्तियां शामिल हैं. कुर्क की गई संपत्तियों में जमीन, मकान, बैंक बैलेंस, वाहन, घरेलू कीमती सामान सब कुछ शामिल है, जो नशे की कमाई से खरीदा गया था.
अब सटोरियों और खाईवालों की तैयार हो रही सूची
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जुआ-सट्टा गिरोहों पर भी यही फार्मूला लागू किया जाएगा. जिले के कई ऐसे सटोरिये और खाईवाल चिन्हित किए जा चुके हैं, जो बार-बार कार्रवाई के बाद भी अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं. ऐसे आदतन अपराधियों की ब्लैक लिस्ट तैयार की जा रही है. उनकी चल-अचल संपत्तियों की जांच कराई जा रही है, साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि कौन-सी संपत्ति सट्टे व जुएं की कमाई से खरीदी गई है। जैसे ही जांच पूरी होगी, वैसे ही उनकी संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क रडार पर
बिलासपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच को हाल के महीनों में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है. आईपीएल, बिग बैश लीग और विदेशी क्रिकेट टूर्नामेंटों में सक्रिय कई बुकियों, खाईवालों और एजेंटों को गिरफ्तार किया जा चुका है. अब पुलिस सिर्फ जेल भेजने पर नहीं, बल्कि बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट, प्रॉपर्टी, शेल कंपनियों, बेनामी लेन-देन तक की जांच कर रही है.
आसान नहीं होती ये कार्रवाई
सूत्रों की माने तो नशा तस्करों और उनके परिवार की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई में ज्यादा नियम व कानूनी प्रक्रिया उतनी उलझी हुई नहीं होती, जितनी अन्य मामलों में कार्रवाई के दौरान होती है. अन्य मामलों के आरोपियों व उनसे जुड़े रिश्तेदारों की संपत्ति की कुर्की के लिए यह साबित करना होता है कि यह संपत्ति अवैध कामों से एकत्रित की गई है.