Rewa News: आंगनबाड़ी में बच्चों के प्रवेश में पिछड़े रीवा और मैहर, विंध्य संभाग की स्थिति खराब

Rewa News: शाला पूर्व शिक्षा देने के अभियान के तहत आंगनबाडी केद्रों को निर्देश है कि वह हर महीने 21 दिन से अधिक शिक्षा बच्चों को दें. इस मामले में रीवा संभाग में सीधी जिले की स्थिति सबसे अधिक खराब है.
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प्रतीकात्मक तस्वीर

Rewa News: आंगनबाड़ी केन्द्रों में कम उम्र के बच्चों का प्रवेश कराने के मामले में विंध्‍य संभाग में रीवा और मैहर जिलों की स्थिति ठीक नहीं है. इसके लिए विभाग की ओर से लगातार निर्देश भी जारी किए जा रहे हैं. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की बैठकें भी ली जा रहीं फिर भी लक्ष्य के अनुरूप काम नहीं हुआ. तीन से छह वर्ष आयु तक के बच्चों को आंगनबाड़ी में प्रवेश दिलाकर उन्हें खेल-खेल में शिक्षा देने के लिए प्रेरित करना है. साथ ही उन्हें पढ़ने और लिखने की आदत डालने का काम भी आंगनबाड़ी केन्द्रों में शुरू कराने के निर्देश है, जिससे जब बच्चे पहली कक्षा में प्रवेश लें तो उन्हें अक्षर ज्ञान के साथ यह भी पता रहे कि पढ़ाई उनके लिए कितनी जरूरी है.

विभाग ने कार्यकर्ता-सहायिका को क्या निर्देश दिए?

आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की कम संख्या में प्रवेश होने पर विभाग ने निर्देशित किया है कि कार्यकर्ता और सहायिका अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर संपर्क करें और लोगों को केंद्र तक बच्चों को भेजने के लिए प्रेरित करें. वहीं विभागीय अधिकारियों का यह भी कहना है कि शहरी क्षेत्र में अधिकांश लोग अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजने के बजाय प्ले स्कूल में भेजते हैं. इसके कारण कम संख्या में पंजीयन हो पा रहा है. वहीं बीते 12 से 20 जनवरी तक आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की संख्या बढ़ाने का निर्देश भी दिया गया था.

21 दिन से अधिक शिक्षा देने में सीधी कमजोर

शाला पूर्व शिक्षा देने के अभियान के तहत आंगनबाडी केंद्रों को निर्देश है कि वह हर महीने 21 दिन से अधिक बच्चों को शिक्षा दें. इस मामले में रीवा संभाग के सीधी जिले की स्थिति सबसे अधिक खराब है. यहां पर 54053 बच्चों को हर महीने सीधी की तरह प्रदेश में शिक्षा देना है, जिसमें 29439 बच्चों को ही बीते महीने 21 दिन से अधिक शिक्षा दी जा सकी. यह तय लक्ष्य का 54.46 प्रतिशत बताया गया.

इन जगहों की स्थिति भी खराब

वहीं नर्मदापुरम, दमोह, झाबुआ, शहडोल इन जगहों की स्थिति भी खराब है. रीवा संभाग में 80190 में 48672 बच्चों को ही 21 दिन से अधिक शिक्षा मिल पाई. यह प्रदर्शन 60.7 प्रतिशत रहा है, जिसे औसत माना गया है. वहीं सिंगरौली में 66.93, मैहर में 69.25, मऊगंज में 72.32 एवं सतना में 75.48 प्रतिशत बच्चों को शिक्षित किया जा रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदेश में सबसे बेहतर स्थिति अशोक नगर जिले की बताई जा रही है.

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मिशन अंकुर में भी रीवा संभाग की स्थिति ठीक नहीं

  1. स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा छोटे बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने के लिए ‘मिशन अंकुर’ की शुरुआत की गई है.
  2. इस मिशन के तहत बुनियादी साक्षरता और अंक गणित पर फोकस किया जा रहा है.
  3. हाल ही में जारी किए गए प्रगति रिपोर्ट में प्रदेशभर में रीवा संभाग की स्थिति काफी खराब बताई गई है.
  4. 27475 बच्चों को शिक्षा देने का लक्ष्य था, लेकिन 13984 तक ही पहुंच सकी. यानी देखा जाए तो लक्ष्य का 50.9 प्रतिशत ही काम हो पाया, जिसमें रीवा जिले में 42.4 प्रतिशत, सीधी में 43.3, सिंगरौली में 47.6 और सतना में 71.6 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हुआ.

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